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सुबह कन्या, दिन में युवा और रात में वृद्धा रूप में नजर आती हैं मां बीसभुजा

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गुना। शहर से करीब दस किलोमीटर दूर बजरंगगढ़ के पहाड़ों पर विराजीं मां बीसभुजा देवी मंदिर पर गुरुवार से नौ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम शुरू होंगे। मां बीसभुजा की महिमा बताते हुए पं. लखन शास्त्री ने बताया कि मां बीसभुजा भक्तों को तीन रूप में दर्शन देती हैं। सुबह कन्या, दोपहर में युवा और संध्या के समय प्रौढ़ (वृद्धा) के रूप में नजर आती हैं। उन्होंने बताया कि मां बीसभुजा देवी मंदिर अति प्राचीन हैं। इस मंदिर की किसी के द्वारा स्थापना नहीं की गई है। सैकड़ों वर्ष पहले बांस के वृक्षों से देवी की प्रतिमा प्रकट हुईं। मां बीसभुजा की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा की आज तक कोई पूरी 20 भुजा नहीं गिन सका है। सिद्धदेवी स्थल के समीप ही हनुमान मंदिर है, इस कारण यह तपोस्थली भी है। यहां कई संतों ने तपस्या की है। मान्यता है प्रसिद्ध बीसभुजा देवी मंदिर की प्रसिद्धि के चलते कई भक्त अपनी अनेक मनोकामना लेकर आते हैं और उनकी प्रार्थना मां के द्वारा पूरी की जाती है। सुबह हवन-यज्ञ और रात में करें जागरण नवरात्र महोत्सव गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। पं. लखन शास्त्री के अनुसार घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त प्रात:काल 6 से 7.30 बजे तक, दोपहर में 11.45 से 3 बजे तक और शाम 4.30 बजे से 6 बजे तक रहेगा। इस बीच दोपहर 11.45 से 1 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। घटस्थापना के समय देवी मां के साथ गणेश, गौरी की वंदना करें। ज्वारे बोएं, सामर्थ अनुसार दुर्गासप्तशती, रामायण, दुर्गा पाठ आदि करें। सामर्थ अनुसार व्रत करें। सुबह हवनयज्ञ और रात के समय माता का जागरण करें। अखंड ज्योति जलाएं।

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