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पाताल भुवनेश्वर गुफा है आस्था का केंद्र

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विश्वभर में शिव शंकर के बहुत से मंदिर व गुफाएं हैं, जो ऐतिहासिक व रहस्यमयी हैं। ऐसी ही एक गुफा उत्तराखंड के गांव भुवनेश्वर में स्थित है। यह पाताल भुवनेश्वर गुफा के नाम से प्रसिद्ध है और भक्तों की आस्था का केंद्र है। यह उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पिथोरागढ़ जिले के गंगोलीहाट के करीब घने वन में है। पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। स्कंदपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं। यह भी वर्णन है कि त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण जब एक जंगली हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में प्रविष्ट हुए तो उन्होंने इस गुफा के भीतर महादेव शिव सहित 33 कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किए थे। द्वापर युग में पाण्डवों ने यहां चौसर खेला और कलयुग में जगदगुरु आदि शंकराचार्य का 822 ईस्वी के आसपास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित किया। गुफा के अंदर का नजारा बेहद ही अलग है। जो इस गुफा में जाता है वो बाहर की दुनिया को भूलकर उसके रहस्यों में खो जाता है। गुफा के अंदर जाने के लिए लोहे की जंजीरों का सहारा लेना पड़ता है यह गुफा पत्थरों से बनी हुई है। इसकी दीवारों से पानी रिस्ता रहता है। गुफा में शेष नाग के आकर का पत्थर है उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे उन्होंने पृथ्वी को पकड़ रखा है। इस गुफा की सबसे खास बात तो यह है कि यहां एक शिवलिंग है जो लगातार बढ़ रहा है। यहां शिवलिंग को लेकर यह मान्यता है कि जब यह शिवलिंग गुफा की छत तक पहुंच जाएगा, तब दुनिया खत्म हो जाएगी। संकरे रास्ते से होते हुए इस गुफा में प्रवेश किया जा सकता है। जमीन के अंदर लगभग 8 से 10 फीट नीचे जाने पर गुफा की दीवारों पर हैरान कर देने वाली आकृतियां नजर आने लगती हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने क्रोध के आवेश में गजानन का जो मस्तक शरीर से अलग किया था, वह उन्होंने इस गुफा में रखा था। दीवारों पर हंस बने हुए हैं जिसके बारे में ये माना जाता है कि यह ब्रह्मा जी का हंस है। गुफा के अंदर एक हवन कुंड भी है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि इसमें जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था जिसमें सभी सांप जलकर भस्म हो गए थे। इस गुफा में एक हजार पैर वाला हाथी भी बना हुआ है। इसके अलावा दिवारों से सफेद दूध की तरह दिखने वाला पदार्थ रिसता रहता है जो हाथ में आते ही पानी बन जाता है।

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