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ग़ज़ल - तेरा ख्याल

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तेरा ख्याल आते ही मुझे, मैं मुस्कुराने लगता हूँ ग़ज़ल लिखने लगता हूँ, या गीत गाने लगता हूँ मुझे पता चल जाता है, मुझे क्या क्या चाहिए इस ख्याल से कि तू है, बहुत कुछ पाने लगता हूँ मुझमें दरारे देखकर अंदर अंधेरा छिपा रहता है तेरा ख्याल चांदनी सा है, मैं जगमगाने लगता हूँ तेरा ख्याल आते ही बस खूबसूरती याद आती है फूल मंगवा लेता हूँ, मेरे घर को सजाने लगता हूँ कभी यूँ भी हुआ है, तेरे ख्याल ने उदास किया है वक्त वक्त की बात है, खुद को समझाने लगता हूँ दिन में तेरा ख्याल आता है, रात में तेरा सपना मेरा हाल छुपाने लगता हूँ तो मैं घबराने लगता हूँ मुझे तेरा ख्याल आता है क्या तुझे भी आता होगा दिल से पूछता हूँ और दिल को ही बताने लगता हूँ ................................................................ अवतार सिंह

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