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करवा चौथ पूजन विधि और मूहूर्त

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सनातन धर्म के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ पड़ता है। करवा शब्द का अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है। वहीं चौथ का शाब्दिक अर्थ चतुर्थी है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सफलता की मनोकामना पूरी होने के लिए कठिन व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत को धारण करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जव्रत रखती हैं। यहां तक कि वो जल ग्रहण भी नहीं करतीं। शाम को जब चद्रोदय होता है यानी चांद निकल आता है तो उसे अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत खोलती हैं। इस साल करवा चौथ 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ कैसे मनाया जाता है महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त इस बार पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक है। अगर समय के लिहाज से देखें तो इसकी कुल अवधि 1 घंटे 7 मिनट है। कब खोलें व्रत अब बात चंद्रोदय यानी चांद के दिखने की। क्योंकि चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस बार चंद्रोदय शाम 7.55 पर होगा।

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