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अखाड़े से बाहर हुए शिवराज सिंह को चुनौती देने वाले कम्प्यूटर बाबा निष्कासन के बाद बाबा का वीडियों आया सामने

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इंदौर । चुनावी घमासान के बीच सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ संतों को लामबंद करने का अभियान चला रहे कम्प्यूटर बाबा को दिगंबर अनी अखाड़े से बाहर कर दिया गया। उनके खिलाफ यह सख्त कदम इस आरोप के तहत उठाया गया है कि वह दलीय राजनीति में शामिल होकर संतों की गरिमा के विपरीत आचरण कर रहे हैं। साधु-संतों के 13 प्रमुख अखाड़ों की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने को बताया, हमारी अनुशंसा पर कम्प्यूटर बाबा को दिगंबर अनी अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। वह संतों की गरिमा के एकदम विपरीत आचरण करते हुए राजनीतिक मैदान में कूद चुके हैं और अपने निजी फायदे के लिये कभी भाजपा, तो कभी कांग्रेस के पक्ष में बात कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि दिगंबर अनी अखाड़े के पंचों की उज्जैन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कम्प्यूटर बाबा को वैष्णव संप्रदाय (अपने इष्ट देव के रूप में भगवान विष्णु को पूजने वाले हिंदू मतावलम्बी) के संतों की इस प्रमुख धार्मिक संस्था से बाहर निकालने का औपचारिक फैसला किया गया। नरेंद्र गिरि ने अखाड़ों के धार्मिक नियमों के हवाले से बताया कि निष्कासन के बाद कम्प्यूटर बाबा दिगंबर अनी अखाड़े के कार्यक्रमों और इसके संतों के सामूहिक भोज आदि में शामिल नहीं हो सकते है। वह प्रयागराज (इलाहाबाद) में आगामी 15 जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ मेले में इस अखाड़े के शाही स्नान और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी हिस्सा नहीं ले सकते है। उधर, निष्कासन के बाद कम्प्यूटर बाबा ने एक वीडियों सामने आया हैं जिसमें वे कह रहे हैं कि शिवराज सिंह चौहान की अगुवायी वाली भाजपा सरकार मेरे खिलाफ चाहे जितने हथकंडे अपना ले। लेकिन मैं नर्मदा नदी के पवित्र आंचल को दागदार नहीं होने दूंगा और गौ माता की दुर्दशा नहीं सहूंगा। मैं हिंदू धर्म की रक्षा के लिए आगे भी अडिग रहूंगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मप्र में संत समुदाय की उपेक्षा की जा रही है और उनके मठ-मंदिर तोड़े जा रहे हैं। कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। वह मध्यप्रदेश में संतों की संस्था षट्दर्शन साधु मंडल के प्रमुख हैं। सूबे की शिवराज नीत भाजपा सरकार ने कम्प्यूटर बाबा समेत पांच धार्मिक नेताओं को अप्रैल में राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। लेकिन कम्प्यूटर बाबा ने कुछ दिन पहले यह आरोप लगाते हुए इस दर्जे से इस्तीफा दे दिया था कि शिवराज सरकार ने खासकर नर्मदा को स्वच्छ रखने और इस नदी से अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के मामले में संत समुदाय से वादाखिलाफी की है।

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