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सतर्क रहिये...मौत की सौगात दे सकती है परफ्यूम की सुगंध!

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दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हुए कई शोधों के निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों ने दावा किया है कि रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल होने वाली चीजों में मौजूद रसायन या सुगंध से कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा हो सकता है। सफाई वाले स्प्रे का रसायन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, तो इत्र समेत अन्य खुशबू वाले उत्पाद, पेंट और डिटरजेंट से माइग्रेन और कैंसर तक हो सकता है। यों, इस बात पर यकीन करना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बात बिल्कुल सच है। इस संबंध में किए गए अनेक अंतरराष्ट्रीय शोधों में यह बात साबित हुई है कि इत्र माइग्रेन के भयंकर सिरदर्द से लेकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण भी हो सकता है। हाल ही शोध के नतीजे साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। शोध से यह पता चला कि खुशबू के प्रति संवेदनशील लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, बंद नाक, सिरदर्द और अस्थमा की शिकायतें उभरीं। कुछ अन्य गंभीर मामलों में मितली आने और त्वचा की समस्याएं उभर आती हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक अन्य अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने इत्र, खुशबू वाले उत्पाद या सफाई वाले रसायनों को माइग्रेन का कारक बताया। विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष 500 लोगों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद निकाला। इस अध्ययन में पाया गया कि लगभग 60 फीसदी मामलों में माइग्रेन का अटैक हुआ, जबकि 68 फीसदी मामलों में लोगों ने नाक और साइनस में परेशानी अनुभव की। मुश्किल यह है कि दुनियाभर में तरह-तरह के क्लीनर्स, रेपेलेण्ट्स, सेण्ट्स, परफ्यूम आदि के उत्पादन और बिक्री के आसमान छूने के लिए लपक रहे आंकड़े बताते हैं कि बड़ी-बड़ी कम्पनियों के बड़े-बड़े आर्थिक हित निहित हैं। धन कमाने की हवस में मौत की सौगात बाँटने वाले धनपति ऐसे शोधों के निष्कर्षों पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।बल्कि, नये-नये सपने दिखाने वाले विज्ञापनों और आक्रामक मार्केटिंग स्ट्रेटेजीज अपना कर उपभोक्ताओं के सामने नये-नये उत्पाद प्रस्तुत कर देंगे। दरअसल, आज की दुनिया का चलन यही है कि अपनी तिजोरियां भरने के लिए धनपशुओं को मौत की सौगातें बाँटने में कोई शर्म नहीं आती। इसलिए उपभोक्ता ही अगर अपने भले की बात समझ सकते हों तो समझ लें।

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