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मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष कमल का जादू बरक़रार रहने पर संशय (देवास विधानसभा चुनाव - 2018 )

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देवास । देवास जिले की सियासी तस्वीर की बात करें तो जिले में कुल 5 विधानसभा सीट हैं। इनमें हाटपिपल्या, बागली, देवास, खातेगांव और सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। पांचों सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है, हाटपिपल्या से दीपक जोशी, बागली से चंपालाल देवड़ा देवास से गायत्री राजे पवार, खातेगांव से आशीष शर्मा सोनकच्छ से राजेंद्र वर्मा विधायक हैं। जबकि 2008 चुनाव में भाजपा सोनकच्छ छोड़कर बाकि चारों सीट पर विजयी रही। ताजे चुनावी समीकरण के अनुसार भाजपा के कमल का जादू इस चुनाव में तीन सीटों पर ख़त्म हो सकता है ये सीट हैं हाटपिपल्या सोनकच्छ और खातेगॉंव। इन तीनो सीटों पर भाजपा की बहुत कम अंतर से जीत हुई थी। सोनकच्छ : सोनकच्छ विधानसभा सीट देवास जिले में आती है।यहां पर कुल 2 लाख 7 हजार 251 मतदाता हैं।यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।इस क्षेत्र में 40 फीसदी से ज्यादा अनुसूचित जाति के वोटर्स हैं।वहीं 30 फीसदी ठाकुर वोटर्स भी हैं।इन दो जाति के वोटर्स ही चुनाव में उम्मीदवार की जीत में अहम भूमिका निभाते हैं।कांग्रेस ने इस सीट पर 1998, 2003 और 2008 में लगातार जीत दर्ज की थी।लेकिन 2013 के चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा।इस चुनाव में बीजेपी के राजेंद्र वर्मा को जीत मिली थी।उन्होंने कांग्रेस के अर्जुन वर्मा को हराया था।राजेंद्र वर्मा को 72644 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के अर्जुन वर्मा को 70764 वोट मिले थे।राजेंद्र वर्मा ने अर्जुन वर्मा को 1880 वोट से हराया था।2008 के चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी।कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा ने बीजेपी के फूलचंद वर्मा को हराया था।सज्जन सिंह को जहां 54787 वोट मिले थे तो वहीं फूलचंद को 54596 वोट मिले थे।ये बेहद करीबी मुकाबला था।सज्जन सिंह ने 191 वोट से जीत हासिल की थी।मुद्दों की बात करें तो सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र में कई मुद्दे हैं।सबसे बड़ा मुद्दा खुद यहां के वर्तमान विधायक हैं जो क्षेत्र में कम सक्रिय रहते हैं।स्वास्थ्य सेवाओं का भी इस क्षेत्र में बुरा हाल है। देवास : देवास विधानसभा सीट राज्य की अहम सीट में से एक है।देवास राज्य के मशहूर शहरों में से एक है।राज्य की राजधानी भोपाल से यह ज्यादा दूर नहीं है, जबकि इंदौर से यह शहर करीब 35 किमी की दूरी पर है।देवास में बैंक नोट प्रेस भी है।आर्थिक व्यय विभाग की औद्योगिक इकार्इ बैंक नोट प्रेस, देवास की संकल्पना 1969 में की गर्इ और 1974 में इसकी स्थापना हुर्इ।देवास के सियासी इतिहास की बात करें तो यह विधानसभा सीट 1957 में वजूद में आई।1962 तक यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी।परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य सीट हो गई है।यह सीट बीजेपी का गढ़ है, हालांकि कभी देवास विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी।बीजेपी इस सीट पर 1990 से लगातार जीत दर्ज करते आई है।यानी पिछले 7 चुनावों में बीजेपी को यहां जीत मिली है।कांग्रेस को आखिरी बार इस सीट पर 1985 में जीत मिली थी।साल 1990 से 2013 तक इस सीट पर एक ही उम्मीदवार का कब्जा रहा है।बीजेपी के युवराज तुकोजीराव पंवार ने इस सीट पर लगातार जीत दर्ज की।हालांकि 2015 में इस सीट पर उपचुनाव जिसमें बीजेपी को फिर जीत मिली।बीजेपी की गायत्री राजे ने जीत हासिल की।बता दें कि तुकोजीराव के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था।तुकोजीराव राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके थे।इस सीट पर कांग्रेस को 6 ,जबकि बीजेपी को 7 चुनावों में जीत मिली है।2015 के उपचुनाव में गायत्री राजे ने कांग्रेस के जय प्रकाश शास्त्री को हराया था।इस चुनाव में गायत्री राजे को 89358 वोट मिले थे तो वहीं जय प्रकाश शास्त्री को 58580 वोट मिले थे।2013 के चुनाव में बीजेपी के तुकोजीराव पंवार ने कांग्रेस की रेखा वर्मा को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।तुकोजीराव को इस चुनाव में 100660 वोट मिले थे तो वहीं रेखा वर्मा को 50541 वोट मिले थे।2008 के चुनाव की बात करें तो तुकोजीराव ने इस बार कांग्रेस के हाजीहरुन भाई को 25 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।तुकोजीराव को इस चुनाव में 59474 वोट मिले थे तो वहीं हाजीहरुन को 34247 वोट मिले थे। बागली : बागली विधानसभा सीट देवास जिले में आती है।2008 से यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।इस क्षेत्र में 60 फीसदी आदिवासी रहते हैं।यहां पर कुल 2 लाख 18 हजार 531 मतदाता हैं।यह सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ है।राज्य के पूर्व सीएम कैलाश जोशी 9 बार यहां से विधायक रह चुके हैं।इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस केवल एक बार बीजेपी को हरा पाई है।कांग्रेस को साल 1998 में जीत मिली थी।2013 के चुनाव में बीजेपी के चंपालाल देवदा ने कांग्रेस के तेर सिंह देवदा को 25 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।2008 के चुनाव में भी बीजेपी के चंपालाल देवड़ा की जीत मिली थी।उन्होंने कांग्रेस के कमल वास्कले को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।बागली विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है।बेरोजगारी और पानी की समस्या आज भी जस की तस है।वहीं स्वास्थ्य के मामले में भी यह क्षेत्र फेल है।यहां के अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। हाटपिपल्या : पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी हाटपिपलिया से लगातार दो बार विधायक रहे और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र सिंह बघेल से 6173 वोटो से जीते थे,2008 में जोशी महज 220 वोटों से जीते उन्होंने कांग्रेस राजेंद्र सिंह बघेल को हराया था लकिन अब यह उनकी जमीनी स्तिथि कमजोर नजर आ रही है,पास के ही विधानसभा खातेगांव पर अब इनकी नजरे टिकी है,अब उनका लगातार आयोजनों में जाना -आना लगा हुआ है।किसान आंदोलन के बाद से जोशी को डर है कि अगला चुनाव खतरे से खाली नहीं है। खातेगाँव : खातेगाँव विधानसभा सीट देवास जिले के तहत आती है यहाँ से आशीष शर्मा भाजपा से विधायक है। २०१३ के चुनाव में शर्मा ने कांग्रेस के श्याम होलानी को 21717 मतों से हराया था। जबकि 2008 के चुनाव में भाजपा के बृजमोहन धूत ने कांग्रेस की राजकुमारी कुंडल को 3657 वोटों के काम अन्तर से मात दी थी। 2003 के चुनाव में भी ब्रजमोहन जीते थे उन्होंने कांग्रेस के नारायण सिंह चौधरी को 1860 मतों से शिकस्त दी थी।

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