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(रायपुर) 17 सीटों पर 5 हजार से ज्यादा वोट नोटा में (छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव विशेष)

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रायपुर । छत्तीसगढ़ में इस चुनाव में भी नोटा यानि इनमे से किसी को वोट नहीं राजनैतिक दलों का खेल बिगाड़ सकता है। 2013 के विधानसभा चुनाव नोटा पर पड़े मतों के लिहाज से बेहद अहम साबित हुए थे। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 34 सीटें यानी एक तिहाई से अधिक पर नोटा तीसरे नंबर पर रहा। 17 सीटों पर नोटा को पांच हजार से ज्यादा वोट मिले और सात सीटें ऐसी रहीं जिनमें हार-जीत का अंतर नोटा को मिले मतों से कम था।नोटा को कुल मिलाकर तीन फीसदी से अधिक मत मिले जबकि भाजपा और कांग्रेस को मिले मतों का अंतर एक फीसद से कम था। मतलब साफ है, सत्ता विरोधी मतों का विरोधी के पक्ष में ध्रुवीकरण रोकने में नोटा की अहम भूमिका रही। आदिवासी बहुल बस्तर और सरगुजा में अधिकांश सीटों पर नोटा को खूब वोट मिले। इन्हीं इलाकों में दस साल से सत्ता पर काबिज रही भाजपा ने अधिकांश सीटें गंवाई थीं। इस बार चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा जोगी कांग्रेस भी जोर लगा रही है। चुनावी पंडितों की नजर नोटा पर है।कुछ कह रहे हैं कि अबकी बार नोटा के वोट तीसरे फ्रंट को जा सकते हैं तो कुछ मानते हैं कि नोटा दरअसल नेताओं के प्रति गुस्से का इजहार करने का माध्यम बना है इसलिए इस बार भी स्वतंत्र भूमिका में ही रहेगा। 2013 के चुनाव में नोटा पर 401069 कुल वोट पड़े जो कि कुल वैध मत का तीन प्रतिशत थे। 2013 के चुनाव में इन सीटों पर नोटा रहा निर्णायक - पत्थलगांव सीट पर 2008 में कांग्रेस जीती थी। रामपुकार सिंह को ही 2013 में कांग्रेस ने उतारा, वे 3909 वोट से हारे जबकि नोटा को 5533 वोट मिले। - धरसींवा में 2008 में भी भाजपा के देवजी भाई पटेल जीते थे। 2013 में भी वे जीते जरूर लेकिन नोटा ने उनकी जीत का अंतर 6339 से घटाकर 2390 पर ला दिया। देवजी बाल-बाल बचे। नोटा को मिले 3740 वोट। - रायपुर ग्रामीण में 2008 में भाजपा के नंदकुमार साहू 2979 वोट से जीते थे। 2013 में भी भाजपा ने उन्हें ही मैदान में उतारा। नोटा को 3524 वोट मिले। नंदकुमार साहू कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण शर्मा से 1861 वोट से हार गए। - कवर्धा सीट पर 2008 में भाजपा के डॉ. सियाराम साहू 10408 मतों से जीते थे। 2013 में भाजपा ने एंटी इंकमबेंसी के भय से प्रत्याशी बदल दिया और अशोक साहू को मैदान में उतारा। मुख्यमंत्री के गृह जिले की इस सीट पर नोटा को 9229 वोट मिले। अशोक जीत तो गए लेकिन जीत का अंतर महज 2558 रहा। जानकार मानते हैं कि अगर भाजपा ने प्रत्याशी न बदला होता तो यह सीट निकल पाना बेहद मुश्किल था। - खैरागढ़ सीट पर 2008 में भाजपा के कोमल जंघेल 19544 वोटों से जीते थे। 2013 में भी भाजपा ने कोमल जंघेल को ही मैदान में उतारा। कांग्रेस से गिरवर जंघेल मैदान में थे। कड़े मुकाबले में नोटा ने 4643 वोट हासिल किए और कोमल जंघेल 2190 वोट से हार गए। - डोंगरगांव सीट पर 2008 में भाजपा के खेदूराम साहू 9407 वोट से जीते थे। 2013 में दिनेश गांधी भाजपा की टिकट पर मैदान में उतरे और कांग्रेस के दलेश्वर साहू से 1698 वोट से हार गए। नोटा को कुल 4062 मत मिले। - कोंडागांव में 2008 में भाजपा से लता उसेंडी चुनाव जीती थीं। वे मंत्री भी रहीं। 2013 में भाजपा ने लता को ही टिकट दिया। कांग्रेस से मोहन मरकाम लगातार दूसरी बार मैदान में उतरे। 2008 में लता उसेंडी 2771 वोटों से जीती थीं। 2013 में नोटा ने 6773 वोट हासिल किया और लता उसेंडी 5135 मतों से मोहन मरकाम से हार गईं। इसके अलावा 27 से अधिक सीटों पर नोटा तीसरे स्थान पर रहा। वहीँ सात सीट ऐसी थी जहाँ इन सीटों पर हार जीत के अंतर से ज्यादा मत नोटा को मिले थे। इन सीटों पर नोटा ने सिटिंग विधायकों को हरा दिया - प्रेमनगर सीट पर नोटा को मिले 5731 मत। यह सीट 2008 में भाजपा के पास थी। कांग्रेस ने जीत दर्ज की। - प्रतापपुर में नोटा को 5814 मत मिले। यह सीट कांग्रेस के पास थी। नोटा से कांग्रेस को नुकसान हुआ और सीट भाजपा की झोली में चली गई। - सामरी सीट पर नोटा को 6118 मत मिला। यह सीट भाजपा के पास थी। कांग्रेस ने छीन ली। - पत्थलगांव में नोटा को मिले 5533 मत। यह सीट कांग्रेस के पास थी। भाजपा को नोटा का सहारा मिला और सीट जीत ली। - धरमजयगढ़ में नोटा को 6726 मत मिले। यह सीट पहले भाजपा के पास थी। 2013 में कांग्रेस ने जीती। - सरायपाली में नोटा को 5410 मत मिले। यह सीट कांग्रेस से भाजपा के पास चली गई। - रामपुर में नोटा पर 5881वोट पड़े। यह सीट भाजपा से कांग्रेस को चली गई। - भाटापारा में नोटा पर 5290 वोट पड़े। कांग्रेस से यह सीट भाजपा ने छीन ली। - खल्लारी में नोटा पर 5931 वोट गिरे। यहां कांग्रेस को नोटा से नुकसान हुआ और भाजपा जीत गई। - बलौदाबाजार में नोटा को 5592 वोट मिले। भाजपा की यह सीट कांग्रेस के पास चली गई। - बस्तर सीट पर नोटा को 5529 वोट मिले। सीट भाजपा से निकलकर कांग्रेस के पास चली गई। - राजिम में नोटा को 5673 वोट मिले। यहां से कांग्रेस हार गई और भाजपा को विजय मिली। - सिहावा में नोटा को 6063 वोट मिले। यह सीट भाजपा ने कांग्रेस से छीन ली। - डौंडीलोहारा में नोटा पर 6197 वोट पड़े। यह सीट भाजपा से कांग्रेस के पास चली गई। - भानुप्रतापपुर में नोटा को 5680 वोट मिले। यह सीट भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस के पास चली गई। - कांकेर में नोटा को 5208 वोट मिले। यह सीट भाजपा से कांग्रेस के पास चली गई। - केशकाल में नोटा को 8381वोट मिले। यह सीट भाजपा से कांग्रेस के पास चली गई। - कोंडागांव में नोटा को 6773 वोट मिले। भाजपा की यह सीट कांग्रेस ने छीन ली। - चित्रकोट में नोटा को 10848 वोट मिले। यह सीट भाजपा से कांग्रेस ने छीन ली। - दंतेवाड़ा में नोटा को 9677 वोट मिले। भाजपा के सिटिंग विधायक हार गए और कांग्रेस जीत गई।

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