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छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 विशेष कांग्रेस की राह आसान नहीं तो भाजपा को भी करनी होगी कड़ी मेहनत बलौदाबाजार विधानसभा चुनाव - 2018

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बलौदाबाजार । बलौदाबाजार की चारों विधानसभा में 2013 के चुनाव में बलौदाबाजार विधानसभा क्रमांक 45 ही कुछ हद तक कांग्रेस के पक्ष में रहा है। शेष तीनों विधानसभा क्रमांक 43 बिलाईगढ़, विधानसभा क्रमांक 44 कसडोल और विधानसभा क्रमांक 46 भाटापारा भाजपा के खाते में है। जिले की चारों सीट पर कांग्रेस की राह आसान नजर नहीं आ रही है। टिकट वितरण में आम जनता के पसंद और नापसंद को ध्यान नहीं रखा गया तो यहां पर जीत नामुमकिन साबित होगा। पिछले पांच सालों में बलौदाबाजार विधानसभा में मात्र जनकराम वर्मा सक्रिय भूमिका निभाते रहे है। एक मात्र यहीं कांग्रेस का नाम लेवा सीट है, जो अब मायावती-जोगी गठबंधन से और टफ हो जाएगा। बलौदाबाजार जिले में व्याप्त जातिय समीकरण को गठबंधन बहुत हद तक प्रभावित करते हुए दिखाई दे रहा है। जोगी अपने मिशन में लगातार आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के गढ़ में सेंध मारने हाथी पर सवार हो चुके है। ऐसे में गठबंधन के हाथी और हल जोतते किसान को रोकने के लिए भाजपा और कांग्रेस के पास कोई प्रशिक्षित महावत नहीं हो जो हाथी पर अंकुश लगा सके। यहां आप, गोंगपा भी भी भाजपा-कांग्रेस के लिए सिरर्दद हो सकते है। बिलाईगढ़ विधानसभा छत्तीसगढ़ के बलोदा बाज़ार जिले की बिलाईगढ़ विधानसभा सीट चुनावी लिहाज से काफी महत्वपूर्ण सीट है। यहां पिछले दो विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही है।2013 विधानसभा चुनाव में ये सीट बीजेपी के हाथ लगी थी। अनुसूचित जाति पर आरक्षित ये सीट पर पिछले चुनाव में बीजेपी के डॉ. सनम जनगड़े ने कांग्रेस के पूर्व विधायक शिव कुमार दहरिया को मात दी थी।2013 में बिलाईगढ़ विधानसभा भाजपा के डा. सनम जांगड़े ने कांग्रेस के डा. शिवडहरिया को 58669 हाजर वोट हासिल कर जीत दर्ज की। बिलाईगढ़ क्षेत्र नाम के अनुरूप ही यहां काम हो रहा है जिस तरह बिल्ली खंभा नोंचती है उसी तरह यहां मतदाता काम नहीं करने पर नोंच देती है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जहां हर विधानसभा में चुनावी घमासान मचता ही है। 2013 के विधानसभा चुनाव में डा. सनम जांगड़े ग्रामीण राजनीति में अपने पैठ को भुनाने में कामयाब रहे है। उन्होंने 2013 में कांग्रेस के दिग्गज नेता और कभी अजीत जोगी के खासमखास रहे डा. शिव डहरिया को हराया था।वर्ष 2008 के परिसीमन में तत्कालीन रायपुर जिले की भटगॉव विधानसभा को विलोपित कर बिलाईगढ़ तहसील, बिलाईगढ़ एवं भटगॉव नगर पंचायत तथा कसडोल तहसील के गिधौरी आर.आई. सर्किल को शामिल कर बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया।अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित इस विधानसभा क्षेत्र से 2008 के चुनाव में कांग्रेस तथा 2013 के चुनाव में भाजपा जीत हासिल करने में कामयाब रही।वहीं बसपा दोनों चुनाव में 20 प्रतिशत से अधिक मत हासिल कर त्रिकोणीय संघर्ष बनाने में सफल रही। अब यहां से छजकां के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला अधिक रोचक होगा। कसडोल विधानसभा छत्तीसगढ़ राज्य में कई ऐसी सीटें हैं जो एक तरह से वीआईपी मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक है बलोदा बाज़ार जिले की कसडोल विधानसभा सीट। छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल यहां से ही विधायक हैं।2013 में कसडोल विधानसभा सीट भाजपा के गौरी शंंकर अग्रवाल ने कांगरेस के राजकमल सिंघानिया को 70701 हजार वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। ग्रामीण परिवेश वाला यह विधानसभा शहरी राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां से अविभाजित मध्यप्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता कन्हैयालाल शर्मा वर्षो तक प्रतिनिधित्व करते रहे है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद शहरी आबोहवा ने कांग्रेस के समीकरण को बिगाड़ दिया।ये सीट दोनों पार्टियों के खाते में जाती रही है। 2013 में भले ही भारतीय जनता पार्टी के गौरीशंकर अग्रवाल यहां से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हों, लेकिन उससे पहले लगातार दो बार ये सीट कांग्रेस ने अपने नाम की थी।सन 1952 से अस्तित्व में आया कसडोल विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस पार्टी की परम्परागत सीट मानी जाती है। अब तक इस क्षेत्र से विधानसभा के संपन्न हुए चुनाव में नौ बार कांग्रेस, दो बार भाजपा तथा तीन बार अन्य अथवा निर्दलीय प्रत्याशी को सफलता मिली है।धार्मिक एवं राजनीति के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखने वाले इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वालों में संयुक्त मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्र दशकों तक म.प्र. मंत्रीमण्डल में शामिल रहे डॉ कन्हैया लाल शर्मा तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल प्रमुख हैं।हारजीत के नजरिये से वर्ष 2008 के चुनाव में सर्वाधिक 27 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत का रिकार्ड राजकमल सिंघानिया कांग्रेस के नाम दर्ज है।आपको बता दें कि इस सीट पर मायावती की बहुजन समाज पार्टी का काफी अहम प्रभाव है। पिछले कुछ चुनाव में बसपा लगातार तीसरे नंबर पर रहती आई है। जिस तरह से हाल ही में कांग्रेस और बसपा के गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं, अगर ऐसा होता है तो ये बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। बलौदाबाजार विधानसभा अविभाजित मध्यप्रदेश में साल 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में बलौदाबाजार सामान्य सीट पर कांग्रेस के गणेश शंकर वाजपेयी विधायक चुने गए थे। छत्तीसगढ़ बनने के बाद साल 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने गणेश शंकर वाजपेयी को दोबारा मैदान में उतारा था। जिन्होंने त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा के विपिन बिहारी वर्मा को 309 मतों से हराया।कांग्रेस के गणेश शंकर वाजपेयी को 23642 मत मिले वहीं भाजपा के विपिन बिहारी वर्मा को 23333 मतों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में बसपा की कलिंद्री वर्मा कुल मतदान का 11.49 प्रतिशत यानि 9904 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रही।साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए लक्ष्मी बघेल को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में भाजपा की चाल कामयाब रही और लगातार जीत हासिल कर रहे कांग्रेस के गणेश शंकर वाजपेयी को एंटीइनकम्बेंसी की वजह से हार का सामना करना पड़ा। बसपा 11 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रही। इस चुनाव में भाजपा की लक्ष्मी बघेल को 56788 मत मिले वहीं कांग्रेस गणेश शंकर वाजपेयी को 51606 मतों से संतोष करना पड़ा। बहुजन समाज पार्टी के महेंद्र कश्यप 16184 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे।साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने पूर्व विधायक लक्ष्मी बघेल को दोबारा मैदान में उतारा था वहीं कांग्रेस ने उम्मीदवार बदलते हुए जनक राम वर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया था। इस चुनाव में कांग्रेस की चाल कामयाब रही और भाजपा की लक्ष्मी वर्मा को त्रिकोणीय मुकाबले में 9977 मतों से हार का सामना करना पड़ा। बहुजन समाज पार्टी 10.58 मत शेयर कर तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के जनक राम वर्मा को 76549 मत मिले वहीं भाजपा की लक्ष्मी वर्मा को 66572 मतों से संतोष करना पड़ा। बसपा के अशोक कुमार जैन 18659 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे।आने वाले चुनाव में कांग्रेस के आगे अपनी जीत बचाने की चुनौती होगी तो भाजपा के आगे जिताऊ उम्मीदवार की तलाश। इस बार बलौदाबाजार सीट पर बसपा-जोगी कांग्रेस गठबंधन भी मैदान में है, जिसकी वजह से त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं।लगभग ढ़ाई लाख मतदाता वाले बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2013 की स्थिति के अनुसार मतदाताओं की संख्या 2,011000 थी। जिसमें 1,08,514 पुरुष 1,.03,926.महिला के अलावा 500 थर्ड जेंडर। मतदाता शामिल है।वर्तमान चुनाव के दौरान लगभग 12000 हजार नए मतदाता जुड़नें का अनुमान हैं। जातिगत आधार पर मतदाताओं की संख्या में करीब 26 प्रतिशत कुर्मी, 24 प्रतिशत साहू 8 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति व 10 प्रतिशत अल्पसंख्यक वर्ग तथा 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति के है।बलौदाबाजार के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 1977 में यहां पहला विधान सभा चुनाव हुआ। इसमें जनता पार्टी के बंसराज तिवारी विधायक चुने गए। हालांकि इसके बाद बलौदाबाजार सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। लेकिन 1993 में करुणा शुक्ला यहां बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीती फिर गणेश शंकर बाजपेयी तीन बार यहां से कांग्रेस के विधायक रहे। हालांकि 2008 में उन्हें बीजेपी की लक्ष्मी बघेल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। भाटापारा विधानसभा बलोदा बाजार जिले की भाटापारा विधानसभा सीट चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण सीट है। यहां पर पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी, हालांकि इससे पहले लगातार यहां पर कांग्रेस ही जीत दर्ज करती आई है।2013 के विधानसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी के शिवरतन शर्मा ने कांग्रेस के प्रतिद्वंदी चैतराम साहू को करीब 13 हज़ार वोटों से हराया था।अगर पिछले तीन चुनावों के इतिहास को देखें तो यहां पर बस दो उम्मीदवारों के बीच ही जंग चल रही है। 2003 और 2008 में एक ओर जहां कांग्रेस के चैतराम साहू ने बीजेपी के शिवरतन शर्मा को हराया था, तो वहीं 2013 में शिवरतन ने कांग्रेसी प्रतिद्ंवदी को मात दी थी।लेकिन इस बार ये मुकाबला कांग्रेस को भारी पड़ सकता है, क्योंकि चैतराम साहू कांग्रेस छोड़ अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में चले गए हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश में साल 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में भाटापारा सामान्य सीट पर भाजपा के शिवरतन शर्मा विधायक चुने गए थे। छत्तीसगढ़ बनने के बाद साल 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवरतन शर्मा को फिर मैदान में उतारा जिन्हें कांग्रेस के चैतराम साहू के हाथों त्रिकोणीय मुकाबले में 1945 मतों से हार का सामना करना पड़ा। बसपा तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के चैतराम साहू को 45398 मत मिले वहीं भाजपा के शिवरतन शर्मा को 43453 मतों से संतोष करना पड़ा।साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायक चैतराम साहू को दोबारा मैदान में उतारा था, जिनका सामना भाजपा के पुराने प्रतिद्वंदी शिवरतन शर्मा से था। इस चुनाव में कांग्रेस अपना जीत बचा पाने में सफल रही। कांग्रेस के चैतराम साहू ने त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा के शिवरतन शर्मा को 6232 मतों से हराया। 6.42 प्रतिशत मत शेयर के साथ बसपा तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के चैतराम साहू को 58242 मत मिले वहीं भाजपा के शिवरतन शर्मा को 52010 मतों से संतोष करना पड़ा। बसपा के अरुण ध्रुव को 8170 मत मिले।साल 2013 भाजपा ने शिवरतन शर्मा को फिर मैदान में उतारा, जो जीत कर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। इस चुनाव में कांग्रेस ने चैतराम साहू को अपना उम्मीदवार बनाया था जिन्हें इंटी इनकम्बेंसी फैक्टर की वजह से हार का समाना करना पड़ा। वहीं बसपा के कमजोर प्रदर्शन से वोट शेयर में गिरावट आई। बसपा के चंद्रकांत यदु 3694 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा के शिवरतन शर्मा को 76137 मत मिले वहीं कांग्रेस के चैतराम साहू को 63797 मतों से संतोष करना पड़ा।

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