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मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष (04 आरएस01एचओ) भगवा रंग को फीका कर पाना बस में नहीं (होशंगाबाद विधानसभा चुनाव - 2018 )

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होशंगाबाद । होशंगाबाद जिले तहत चार विधानसभा सीट शामिल है ये हैं पिपरिया, होशंगाबाद, सिवनी मालवा और सोहागपुर। फिलहाल चारो सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी हैं। 90 के बाद होशंगाबाद और हरदा जिले में भाजपा निरंतर मजबूत होते गई वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपने मूल जनाधार को भी नहीं बचा पायी है।होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र में 1952 से 2013 तक कुल 14 बार विधानसभा के चुनाव में 8 बार कांग्रेस और 6 बार भाजपा ने बाजी मारी है। लेकिन अब माहौल बदल चूका है यहाँ भगवा रंग पूरा रंग जमा चुका है कांग्रेस को अपना खोया जनाधार हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा। सिवनी मालवा : सिवनी मालवा विधानसभा सीट हौशंगाबाद जिले के अंतर्गत आती है। यहां की कुल जनसंख्या 86, 195 है। यहां के लोग खेती पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। एशिया का सबसे बड़ा सोयाबीन प्लांट सिवनी मालवा में ही है।यहां के चुनावी इतिहास की बात करें तो इस सीट पर 9 चुनाव हुए हैं, जिसमें से 6 बार कांग्रेस तो 3 बार बीजेपी को जीत मिली है। बीते दो चुनावों में इस सीट पर बीजेपी को ही जीत मिली। बीजेपी के सरताज सिंह यहां के विधायक हैं।2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दादा हजारी लाल को हराया था। सरताज सिंह को 78374 वोट मिले थे, वहीं दादा हजारी लाल को 65827 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 12 हजार से ज्यादा वोटों का था।अगर 2008 के चुनाव की बात करें तो इस बार भी बीजेपी को ही जीत मिली थी। सरताज सिंह इस बार भी चुनाव जीते थे और हारने वाले कांग्रेस के ही दादा हजारी लाल थे। सरताज सिंह को 2013 के मुकाबले कम वोट मिले थे। उनको 54132 वोट मिले थे। वहीं दादा हजारी लाल को 46287 वोट मिले थे। सरताज सिंह ने ये चुनाव 7 हजार वोटों से जीता था।उज्जैन में जन्मे सरताज सिंह दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। इसके बाद वह अपने घर के ही बिजनेस में लग गए। उन्होंने राजनीति की शुरुआत 1970 में की। उन्होंने 1989 से 1996 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रामेश्वर नीखरा को लगातार मात दी।इसके बाद 1998 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे अर्जुन सिंह को हराया। 2004 में एक बार फिर उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। बीजेपी ने उन्हें 2008 में सिवनी मालवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में उतारा। इसके बाद से ही वह विधायक हैं। 2009 में वे मंत्री भी बने। 2016 में 75 साल से ज्यादा की उम्र होने के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। होशंगाबाद : प्रदेश की हौशंगाबाद विधानसभा सीट हौशंगाबाद जिले में आती है। यहां की कुल जनसंख्या 5,70,465 है। होशंगाबाद की स्थापना मांडू (मालवा) के द्वितीय राजा सुल्तान हुशंगशाह गौरी द्वारा पन्द्रहवी शताब्दी के आरंभ में की गई थी। हौशंगाबाद नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह सीएम शिवराज सिंह चौहान के घरेलू क्षेत्र बुदनी के पास की विधानसभा सीट है। यहां पर ब्राह्मण, कुर्मी और एससी वोटर की संख्या है जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनकी संख्या करीब 95 हजार है।इस सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीता शरण शर्मा यहाँ से विधायक हैं। उन्होंने 2013 के चुनाव में कांग्रेस के रवि किशोर जयसवाल को हराया था। सीता शरण को 91760 वोट मिले थे, तो वहीं रवि किशोर को 42464 वोट मिले थे। यानी कि सीता शरण ने 49 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।2008 के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी, लेकिन इस बार उसका उम्मीदवार कोई और था। बीजेपी ने गिरजा शंकर शर्मा को मैदान में उतार था और उन्होंने कांग्रेस के विजय दुबे को हराया था। गिरजा शंकर को 54523 वोट मिले थे, तो वहीं विजय दुबे को 29203 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 25 हजार से ज्यादा वोटों का था।इस सीट पर आम आदमी पार्टी और बसपा बीजेपी और कांग्रेस का वोट काटने का काम कर सकती हैं। हौशंगाबाद नगर रेत उत्खनन को लेकर खासा चर्चा में रहता है। यहां अवैध रेत उत्खनन को लेकर हमेशा ही राजनीतिक खींचतान मची रहती है। आगामी विधानसभा चुनाव में अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा हौशंगाबाद विधानसभा सीट पर अपना प्रभाव दिखा सकता है। कांग्रेस इस मुद्दे के सहारे यहां पर चुनाव जीत की आस लगाए बैठी है। सोहागपुर : सोहागपुर मध्य प्रदेश के हौशंगाबाद जिले में आता है। सोहागपुर को ब्रिटिश भारत में नवाब कवी हम जाफर अलवी के अधीन शासन गोंडवाना रियासत राज्य की राजधानी के लिए भी जाना जाता है। इस शहर को सुहागपुर-सोभागीपुर-शोनीतपुर से इसका नाम मिला। सोहागपुर में ब्राह्मण और गुर्जर प्रमुख हैं। इनकी संख्या 75 हजार से अधिक है। मीना, यादव और राजपूत भी करीब इतने ही हैं।फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के विजयपाल सिंह यहां के विधायक हैं। उन्होंने 2013 के चुनाव में कांग्रेस के रणवीर सिंह गलचा को हराया था। विजयपाल सिंह को 92859 वोट मिले थे तो वहीं रणवीर सिंह को 63968 वोट मिले थे। विजयपाल सिंह ने 28 हजार से ज्यादा वोटों से कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था।इससे पहले 2008 के चुनाव में भी विजयपाल सिंह ने जीत हासिल की थी। उन्होंने इस बार भी कांग्रेस के ही रणवीर सिंह गलचा को हराया था। विजयपाल सिंह को 56578 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के रणवीर सिंह के 40037 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 16 हजार से ज्यादा वोटों का था। पिपरिया : पिपरिया विधानसभा सीट हौशंगाबाद जिले के अंतर्गत आती है। यहां पर कुल 2 लाख 4 हजार 522 मतदाता हैं। यह इलाका उन्नत खेती के लिए जाना जाता है। वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। ठाकुरदास नागवंशी यहां के विधायक हैं।2013 के चुनाव में ठाकुरदास नागवंशी ने कांग्रेस की ममता नगोतरा को 51 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। ठाकुरदास को 91206 वोट मिले थे तो वहीं ममता नगोतरा को 40049 वोट मिले थे। 2008 के चुनाव की बात करें तो इस बार भी बीजेपी केठाकुरदास नागवंशी को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के तुलाराम बेमन को हराया था। ठाकुरदास को 51249 वोट मिले थे तो वहीं तुलाराम को 28484 वोट मिले थे। यानी कि ठाकुरदास ने 22 हजार से ज्यादा वोटों से कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था।2003 में अर्जुललाल पलिया ने कांग्रेस से टिकट न मिलने पर सपा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।इस इलाके में फसल की बंपर पैदावार होती है, लेकिन इसके बावजूद यहां के किसान परेशान हैं। शिक्षा, विकास और रोजगार के नाम पर यह इलाका फेल है। यहां पर किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिलता है।

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