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छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 विशेष विकास के दम पर भाजपा को फिर कब्जे की उम्मीद गरियाबंद विधानसभा चुनाव - 2018

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गरियाबंद । गरियाबंद जिले में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावों में जीत हासिल करने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। तमाम राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए खुद को जनता का असली हितैषी साबित करने में जुटी हैं। संयुक्त मध्य प्रदेश को तीन बार मुख्यमंत्री देने वाला गरियाबंद जिला अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहा है। कभी पं. श्यामाचरण शुक्ल और संत पवन दीवान भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। तब गरियाबंद रायपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। छत्तीसगढ गठन के बाद एक जनवरी 2012 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गरियाबंद को जिला घोषित किया था, जिसमें राजिम और बिन्द्रानवागढ़ दो विधानसभा शामिल की गई। दोनों पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। राजिम से संतोष उपाध्याय और बिन्द्रानवागढ़ से गोवर्धन मांझी विधायक हैं। बीजेपी ने इस बार फिर अपने विकास के दम पर दोनो सीटें जीतने का दावा किया है। राजिम विधानसभा गरियाबंद जिले की राजिम विधानसभा सीट। राजिम का नाम आते ही सबसे पहले जेहन में जो आता हैं, उसमे पहला है राजिम कुंभ और दूसरे हैं अविभाजित मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री रहे श्यामाचरण शुक्ल। आस्था और सियासत दोनों के लिहाज से राजिम बेहद खास है। पहले बात कर लेते हैं सियासत की। राजिम शुरू से ही 6कांग्रेस या कहें कि शुक्ल परिवार का सियासी गढ़ रहा है। श्यामाचरण शुक्ल के बाद यहां उनके बेटे अमितेष शुक्ल परिवार की सियासी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि बीच-बीच में बीजेपी ने इस सीट पर सेंध लगाने में सफलता हासिल की है।श्यामाचरण शुक्ल ने यहां से पहला चुनाव 1962 में जीता और उसके बाद जीत की हैट्रिक लगाते हुए उन्होंने 1972 तक तीन चुनाव जीते। लेकिन 1977 में देशव्यापी कांग्रेस विरोधी लहर का असर यहां भी दिखा और जनता पार्टी के पवन दीवान ने श्यामाचरण शुक्ल को मात दी। फिर 1980 में यहां से कांग्रेस के जीवनलाल साहू जीते।राज्य बनने के बाद 2003 के चुनाव में बीजेपी के चंदूलाल साहू ने अमितेष को हराकर कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया। इसके बाद 2008 में अमितेष ने अपनी गलतियों को सुधारा और बीजेपी के संतोष उपाध्याय को हराकर एक बार फिर सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिया।2013 में बीजेपी ने संतोष उपाध्याय पर ही भरोसा जताया। इस बार संतोष उपाध्याय अमितेष शुक्ल को 18 सौ वोटों से मात देकर विधानसभा पहुंचे।इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में दो बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। ख़ास बात ये है कि कोई भी पार्टी लगातार यहां जीत दर्ज नहीं कर पाई है। 2013 विधानसभा चुनाव, संतोष उपाध्याय, बीजेपी, कुल वोट मिले 69625 अमितेश शुक्ल, कांग्रेस, कुल वोट मिले 67184 2008 विधानसभा चुनाव, अमितेश शुक्ल, कांग्रेस, कुल वोट मिले 55803 संतोष उपाध्याय, बीजेपी, कुल वोट मिले 51887 2003 विधानसभा चुनाव, चंदूलाल साहू, बीजेपी, कुल वोट मिले 57798 अमितेश शुक्ल, कांग्रेस, कुल वोट मिले 45922 बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी जीत दर्ज करती आई है, लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनावों से बीजेपी बड़े अंतर से इस सीट पर अपना कब्जा जमाए हुए है।बीजेपी ने यहां से जब जब प्रत्याशी बदलकर चुनाव लड़ा है, तब तब पार्टी को जीत हासिल हुई है। ये सीट एसटी के लिए आरक्षित है। बिन्द्रानवागढ़ में 2013 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के गोवर्धन सिंह मांझी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने यहां कांग्रेस के जनक ध्रुव को करीब 30 हजार वोटों से मात दी थी। 2013 विधानसभा चुनाव, गोवर्धन सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 85843 जनक ध्रुव, कांग्रेस, कुल वोट मिले 55307 2008 विधानसभा चुनाव, धमरू धर पुजारी, बीजेपी, कुल वोट मिले 67505 ओंकार शाह, कांग्रेस, कुल वोट मिले 50801 2003 विधानसभा चुनाव, ओंकार शाह, कांग्रेस, कुल वोट मिले 53209 गोवर्धन सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 44413

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