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दीपावली पर विशेष (श्री गणेश महालक्ष्मी पूजन) डॉ.पीएल गौतमाचार्य श्री गणेश लक्ष्मीन्द्र प्रभु, ऋद्धि-सिद्ध दातार। आन विराजो आज मह, कर दो मम उद्धार।।

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7 नवम्बर 2018 कार्तिक कृष्ण अमावस्या बुधवार में श्री महालक्ष्मी पूजन (दीवाली) पर्व मान्य रहेगा। गणितानुसार इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष में अमावस्या तिथि रात्रि 9/39 तक रहेगी लक्ष्मी पूजन के लिए अति उत्तम मानी जायेगी। स्वाती नक्षत्र सायं 7/36 मिनट तक रहेगा। आचुत्य मान योग सायं 5/56 बजे तक उपरांत सौभाग्य योग भोगेगा, बुधवार में स्वाती आ जाने से बना ध्रूम योग मध्यम रहेगा। स्वाती नक्षत्र चर चल संज्ञक उद्योग धंधे दुकानदार व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ हैं। दीपावली लक्ष्मी जी की उत्पत्ति होने से सभी तरह के काम धंधे वालों के लिए शुभ मानी गई हैं। लक्ष्मी पूजन में दिन के लग्न मुर्हूत- कुछ व्यापारी अपने उद्योग धंधे, व्यवसाय, प्रतिष्ठान आदि में लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न श्रेष्ठ मानते हैं। क्योंकि धनु लग्न का स्वामी शुभ ग्रह बृहस्पति जी हैं। ये सबकी सफलता में सहायक रहते हैं। धनु लग्न- दीपावली दिन बुधवार में सुबह 9/36 बजे से शुरु होगी तथा सुबह 9/20 बजे तक लाभ अमृत के चौघड़िय शुभ फलदायक रहेगे धनु लग्न में शनि बढ़ोत्तरी में सहायक रहेगा किसी भी धंधे वाले अपने यहां पूजन करा सकते हैं। मकर लग्न- मकर लग्न 11/41 में शुरु होगी जोकि 12/20 तक अभिजीत मुर्हूत तो रहेगा, श्रेष्ठ नहीं हैं। कुंभ लग्न- दीपावली दिन बुधवार दिन में 13/25 दिन से 14/54 के मध्य तक रहेगी दिन में 13/24 से 14/46 तक उद्वेग चौघड़िया मुर्हूत रहेगा जिसके स्वामी रवि श्रेष्ठ फलदायक हैं। लग्न अपने स्वामी से दृष्ट होने के कारण बलवान कही जायेगी। मीन लग्न- बुधवार में 14/54 से 16/21 के मध्य रहेगी श्री गणेश लक्ष्मी त्रिदेव परम शक्ति नवग्रह कुबेर भंडारी रिद्धी-सिद्धी सहित सभी बहीखाता, कलम, दावात पूजन करने तथा करवाने वाले सभी लाभ उन्नति की ओर अग्रसर होते रहेंगे। मेष लग्न- लक्ष्मी पूजन वाले दिन 16/21 बजे से 17/58 बजे तक रहेगी मेष लग्न सूर्य, चंद्र, शुक्र से प्रभावित रहेगी और गौधूलि का प्रभाव तथा प्रदोष के उत्तम समय का समागम असफलता के मध्य सफलतादायक कहा जायेगा (धेनू धूरि बेला लग्न, सकल सुमंगल मूल) दीपावली पूजन और रात्रि के लग्न मुर्हूत- वृष लग्न दीप मालिका दिन बुधवार की रात्रि में 16/58 बजे प्रदोष के समय शुरु होकर 19/55 बजे तक रहेगी वृष लग्न पर बुध, बृहस्पति की सप्तम दृष्टि तथा मंगल की चौथी दृष्टि पड़ेगी जोकि भौतिक विकास में सहायक कही जायेगी। रात्रिबेला में उद्वेग शुभ अमृत और चर के चार चौघड़िया मुर्हूत 24 बजकर 3 मिनट तक फल दायक रहेंगे। प्रदोष के समय उद्वेग के चौघड़िया व्याप्ति मनोकामना पूर्ति में सहायक बनेगी प्रदोष समय लक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया हैं। प्रदोष समय राजन, कर्तव्या दीप मालिका प्रदोष काल में दीपावली पूजन को श्रेष्ठ माना गया हैं। सब तरह से श्रेष्ठ हैं। प्रदोष के अधिपति आशुतोष भगवान शंकर जी सब प्रकार की समृद्धि प्रदान करेंगे। मिथुन लग्न- दीपावली की रात्रि बेला में 19/55 बजे शुरु होकर 22/09 बजे तक समाप्त होगी इसमें शुभ अमृत के दो चौघड़िया मुर्हूत भोगेंगे जो कि सभी तरह से काम धंधे करने वालों के लिए शुभ फल प्रदान करेगें। लग्न पर शनि का सीधा प्रभाव उद्योग संचालकों को शुभ कहा जायेगा। कर्क लग्न में- दीपावली की रात्रि 22/09 में 24/27 तक रहेगी जिसकी व्यप्ति निशीथ काल में अत्यंत सुखद मानी जायेगी शुभ समय में पूजन करना व करवाने वालों उत्तरोक्तर लाभ उन्नति की और अग्रसर होते जाते हैं। इस वर्ष 23/43 बजे से निशीथ काल आ जायेगा। लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम फलदायक रहेगा। श्री गणेश महालक्ष्मी, इंद्र, वरुण, कुबेर, भंडारी सिद्ध रिद्ध शक्तिन सहित की ब्रम्हा, विष्णु, महेश, नवग्रह, मंगल देवतादि पूजन कराकर बही खाता, वसना, पूजन करने, कराने वाले उतरोक्तर लाभ के भागी बनेंगे तथा लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती हैं। पूजन द्विजाचार्यों से कराने में लक्ष्मी का भंडार कभी खाली नहीं रहता क्यों कि इसमें पुण्य का अंश मिल जाना हैं। लक्ष्मी के भंडार की, बड़ी अपूरबवात्। ज्यो खर्चे त्यों-त्यों बढ़ें, बिन खरचे घट जात।।

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