Friday ,14-Dec-18 ,
- 860211211      - padamparag@gmail.com
ताज़ा खबर

(राजस्थान चुनाव-2018) बार बार सरकार बदलने का मिथक तोड़ना चाहती है भाजपा

padamparag.in

राजस्थान विधानसभा के अगले माह होने जा रहे चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस पार्टी पूरजोर प्रयास कर रही है कि यथा सम्भव प्रदेश में अगली सरकार उनकी बने। वर्ष 1998 से राजस्थान में यह मिथक चला आ रहा है कि एक बार भाजपा व एक बार कांग्रेस की सरकार बनती रही है। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है व कांग्रेस पार्टी चाहती है कि अगली सरकार उनकी बने। वहीं भाजपा का पूरा प्रयास है कि गत 20 वर्षो से चले आ रहे मिथक को तोड़ कर एक बार फिर से उनकी पार्टी की ही सरकार बने। 2013 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल कर इतिहास बनाया था। उस चुनाव में भाजपा को 163 सीटो पर जीत मिली थी जो अपने आप में एक रिकार्ड था। उससे पूर्व राजस्थान में इतनी सीटो पर कोई पार्टी नहीं जीत सकी थी। 2013 के चुनाव में भाजपा को प्रदेश में कुल 13939203 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 45.2 प्रतिशत था। भाजपा ने 10.9 प्रतिशत वोटो की बढ़ोत्तरी की थी। वहीं कांग्रेस को सबसे कम मात्र 21 सीट ही मिल पायी थी। कांग्रेस को 10204694 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 33.1 प्रतिशत थे। कांग्रेस के वोटो में 3.7 प्रतिशत की कमी आयी थी जिस कारण कांग्रेस को 75 सीटो का घाटा उठाना पड़ा था। आगामी चुनावो में भाजपा का पूरा जोर सत्ताविरोधी माहौल को कम करने पर है। टिकट वितरण से पूर्व भाजपा नेता जम कर मेहनत कर रहे हैं। भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय व प्रादेशिक स्तर के 23 नेताओ को प्रदेश के सभी 33 जिलो में जाकर ग्राउण्ड रिपोर्ट तैयार करने को कहा जिसे वे नेता पूरा कर चुके हैं। सभी 23 नेताओं ने अपने प्रभारवाले जिलो में जाकर कार्यकर्ताओ से प्रत्याशियों के बारे में राय सुमारी कर चुके हैं। अब इन नेताओं द्वारा लिये गये फीडबैक पर जयपुर में बैठकर वरिष्ठ नेता चर्चा कर अन्तिम सूची तैयार कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौपेंगें। भाजपा ने प्रदेश में चुनाव की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी है। पार्टी संगठन से जुड़े पदाधिकारी व हर विधानसभा क्षेत्र में लगाये गये विधानसभा विस्तारक बूथ लेबल पर पहुंच कर कार्यकताओं को सक्रिय करने में जुटे हैं। भाजपा के बूथ प्रभारियों के साथ-साथ पन्ना प्रभारी व अर्ध पन्ना प्रभारियों से संगठन के बड़े नेता निरन्तर सम्पर्क में रह कर उनका मनोबल बढ़ा रहें हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता भी प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय होकर भाजपा को जिताने के लिये मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रदेश में पिछले पांच सालों में विकास के खूब काम हुये हैं। सरकार में शामिल किसी भी सदस्य पर भ्रष्टाचार के या अन्य कोई आरोप नहीं लगे हैं। जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के कई मंत्रियों को विभिन्न आरोपो में जेल की हवा खानी पड़ी थी। उस समय के कई आरोपी नेता तो अभी तक जेलो में बन्द पड़े हैं। हाल के अलवर व अजमेर लोकसभा सीटो पर उपचुनावो में हार के बाद भाजपा ने अपनी स्थिति में जबरदस्त सुधार करते हुये फिर से वापसी की संभावना बना दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सफल रैली, अमित शाह के लगातार प्रदेश भर में किये गये दौरे व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे द्वारा प्रदेश भर में निकाली गयी गौरव यात्रा से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत बहुत हुआ है। भाजपा ने नेताओं की आपसी गुटबाजी पर भी काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है। भाजपा मुख्यमंत्री राजे को ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ रही है जबकि कांग्रेस में सरकार बनने पर मुख्यमंत्री बनने की लड़ाई अभी से देखने को मिल रही है। उपर से कांग्रेस के राजस्थान के सह प्रभारी चार राष्ट्रीय सचिवों को भ्रष्टाचार के आरोपो के चलते हटाने से कांग्रेस बैकफुट आ गयी है। कांग्रेस नेताओं को उनको हटाने को लेकर सफाई देनी पड़ रही है। राजस्थान में बसपा अकेले चुनाव लड़ रही है। निर्दलिय विधायक हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में एक नई पार्टी का गठन कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। हनुमान बेनीवाल का जाट बहुल क्षेत्र में ज्यादा प्रभाव होने से कांग्रेस को जाट वाटो का नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसका भाजपा को ही लाभ मिलता नजर आ रहा है। बसपा को 2013 के चुनाव में 10 लाख 41 हजार 241 वोट व तीन सीटे मिली थी। गत चुनाव में बसपा को मिले 3.4 प्रतिशत मत कांग्रेस खाते से ही निकले थे जिस कारण कांग्रेस की भारी दुर्गती हुयी थी। 2013 के चुनाव में चार सीट व 4.3 प्रतिशत मत प्राप्त करने वाले नेशनल पिपुल्स पार्टी के प्रमुख डा.किरोड़ीलाल मीणा अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर चुके हैं। जिससे भाजपा को मीणा के प्रभावक्षेत्र वाली 20-25 सीटो पर लाभ मिलेगा। राजस्थान में कांग्रेस का किसी अन्य भाजपा विरोधी पार्टी से गठबंधन नहीं होने का लाभ भाजपा को ही मिलना तय है, क्योंकि इससे भाजपा विरोधी मत एकजुट नहीं हो पायेगें। कम्युनिस्ट पार्टियां भी कई सीटो पर कांग्रेस के लिये वोट कटवा ही साबित होगी। प्रदेश में कुछ सीटो पर वामपंथियो का अच्छा प्रभाव है। भाजपा से नाराज चल रहे कुछ राजपूत नेताओं को मनाने का अन्दरखाने प्रयास चल रहा है। हालांकि राजपूत समुदाय को सबसे ज्यादा टिकट भाजपा ही देती रही है, इस कारण आखिर में राजपूत समुदाय का झुकाव भाजपा की तरफ होने की अधिक सम्भावना नजर आ रही है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 25 सीटे हैं व सरकार बनाने के लिये उनको चारगुणा सीटो में बढ़ोत्तरी करनी होगी। भाजपा के अभी 161 विधायक है। भाजपा यदि अपने 65 प्रतिशत विधायको को भी फिर से जीतवा पाने में सफल हो जाती है तो प्रदेश में फिर सरकार बनाने में कामयाब हो जायेगी। कांग्रेस को अपनी सीटो में चार गुणा की बढ़ोत्तरी करने पर ही कामयाबी मिल सकती है। कुल मिलाकर बोला जा सकता है कि भाजपा अपनी एकजुटता व पूरी तैयारी के साथ पुन: सत्ता पर काबिज होने के संकल्प के साथ चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। इसी कारण भाजपा के नेता आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रहे हैं।

Related Posts you may like

प्रमुख खबरें