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दुर्ग पर बारी बारी से होता रहा कब्ज़ा दुर्ग विधानसभा चुनाव - 2018

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दुर्ग । छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के तहत छह विधानसभा सीट आती हैं पाटन, दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, भिलाई नगर,वैशाली नगरऔर अहिवारा।पाटन सीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल विधायक है। दुर्ग शहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ और दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा विधायक हैं दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में बीजेपी के रमशीला साहू विधायक हैं भिलाई नगर में बीजेपी के प्रेम प्रकाश पांडेय विधायक है वैशाली नगर बीजेपी के विद्यारतन भसीन और अहिवारा में भाजपा के सांवलाराम डाहरे विधायक हैं। पाटन विधानसभा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट पर प्रदेश भर की निगाहें टिकी हुई है। कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल की वजह से सबसे हॉट मानी जा रही है। पिछले तीन चुनाव से चाचा-भतीजे भूपेश बघेल और विजय बघेल के बीच यहां मुकाबला है। पाटन सीट पर दो बार भूपेश बघेल को और एक बार विजय बघेल को जीत हासिल हुई है। मौजूदा समय में कांग्रेस का कब्जा है। जबकि इससे पहले बीजेपी ने जीत हासिल की थी।2013 के नतीजे में कांग्रेस के भूपेश बघेल को 68185 वोट मिले थे। बीजेपी के विजय बघेल को 58442 वोट मिले थे। वहीँ 2008 के नतीजे में भूपेश हार गए थे बीजेपी के विजय बघेल को 59000 वोट मिले थे।कांग्रेस के भूपेश बघेल को 51158 वोट मिले थे। 2003 के परिणाम में कांग्रेस के भूपेश बघेल को 44217 वोट मिले थे।एनसीपी के विजय बघेल को 37308 वोट मिले थे।पाटन विधानसभा हमेशा से जिले में राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इस इलाके में प्रारंभ से ही राजनीतिक चेतना रही है, जिसका असर चुनाव में देखने को मिलता रहा है। यही वजह है कि यहां के मतदाताओं ने हमेशा अपने विवेक से मतदान किया और परिणाम में हरबार उलट फेर होते रहे हैं।इस क्षेत्र में खास बात यह भी है कि जब भी यहां त्रिकोणीय मुकाबले हुए है तब-तब कांग्रेस में फायदे में रही है। जबकि सीधे मुकाबले में कांग्रेस के विरोधियों ने जीत दर्ज की है। पिछले तीन चुनाव से चाचा-भतीजे भूपेश बघेल व विजय बघेल के बीच यहां मुकाबला हुआ है। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट प्रदेश की चर्चित सीटों में गिनी जाती है। मौजूदा समय में बीजेपी के रमशीला साहू विधायक हैं और रमन सरकार में मंत्री भी हैं। हालांकि एक दौर में ये कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यही वजह है कि बीजेपी के इस कब्जे वाली विधानसभा सीट पर कांग्रेस वापसी की कोशिश में है। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट मोतीलाल वोरा, प्यारेलाल बेलचंदन और वासुदेव चंद्राकर जैसे दिग्गज नेताओं की सियासी जमीन रही है। लेकिन वक्त के साथ इस सीट की सियासी तस्वीर भी बदलती चली गई। मौजूदा समय में बीजेपी का इस सीट पर कब्जा है। 2013 के चुनाव नतीजे बीजेपी के रमशीला साहू को 50327 वोट मिले थे।कांग्रेस के परमिता चंद्राकर को 47348 वोट मिले थे।2008 के चुनावी परिणाम में कांग्रेस के परमिता चंद्राकर को 49710 वोट मिले थे।बीजेपी के प्रीतपाल बेलचंदन को 48153 वोट मिले थे।दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट को सियासी नजरिए से तो चमकती दिखाई देती, लेकिन विकास से कोसो दूर खड़ा है। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा की हालत काफी खराब है। दुर्ग शहर विधानसभा छत्तीसगढ़ की दुर्ग शहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ और दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा विधायक हैं। दुर्ग शहर सीट राज्य की हाई प्रोफाइल सीट मानी जाती है। बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की सियासी जमीन रही है। कांग्रेस के प्यारेलाल बेलचंदन, मोतीलाल वोरा और दाऊ वासुदेव चंद्राकर तो बीजेपी के हेमचंद यादव और सरोज पांडे जैसे नेता इस सीट से प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।2013 के नतीजे में कांग्रेस के अरुण वोरा को 58645 वोट मिले थे।बीजेपी के हेमचंद्र यादव को 53024 वोट मिले थे। 2008 के परिणाम में बीजेपी के हेमचंद्र यादव को 53803 वोट मिले थे। कांग्रेस के अरुण वोरा को 53101 वोट मिले थे।2003 के नतीजे में बीजेपी के हेमचंद्र यादव को 107484 वोट मिले थे।कांग्रेस के अरुण वोरा को 84911 वोट मिले थे। भिलाई नगर विधानसभा छत्तीसगढ़ की भिलाई नगर विधानसभा हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है क्योंकि इसी सीट से विधायक हैं प्रेमप्रकाश पांडेय जो कि प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।छत्तीसगढ़ की भिलाई नगर विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है। सामान्य सीट भिलाई नगर में भाजपा-कांग्रेस का बारी-बारी से कब्जा रहा है। पिछले 25 साल से भाजपा के प्रेम प्रकाश पांडेय और कांग्रेस के बदरुद्दीन कुरैशी बारी-बारी से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।पिछले चुनाव में हालांकि श्री कुरैशी को 17 हजार मतो से हार मिली थी जो की उनकी 2008 की जीत के अंतर से दुगुना है। 2013 के नतीजे में बीजेपी के प्रेम प्रकाश पांडेय को 55654 वोट मिले थे।कांग्रेस के बदरुद्दीन कुरैशी को 38548 वोट मिले थे।2008 के परिणाम में कांग्रेस के बदरुद्दीन कुरैशी को 52848 वोट मिले थे।बीजेपी के प्रेम प्रकाश पांडेय को 43985 वोट मिले थे।2003 के नतीजे में बीजेपी के प्रेम प्रकाश पांडेय को 75749 वोट मिले थे।कांग्रेस के बदरुद्दीन कुरैशी को 60745 वोट मिले थे। वैशाली नगर विधानसभा वैशालीनगर विधानसभा सिर्फ 27 वार्डों की विधानसभा होने के बावजूद यहां का चुनाव काफी दिलचस्प होता है। हर साल प्रमुख पार्टियों अपनी प्रत्याशी बदलकर नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारते है। यहां की जनता भी हर बार अलग पार्टी को जीत का सेहरा पहनाती आ रही है। पिछले 10 साल में इस विधानसभा ने दो विधानसभा चुनाव आैर एक उपचुनाव देखे है। जिसमें कांग्रेस और भाजपा ने बारी-बारी से जीत दर्ज की है। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस विधानसभा सीट से भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री और राज्य सभा सांसद डॉ. सरोज पांडेय ने एक अनोखा रिकार्ड दर्ज किया।दुर्ग महापौर रहते हुए 2008 में उन्होंने भाजपा की टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के बृजमोहन सिंह को 21 हजार वोटों से हराया था। इसके बाद 2009 में लोकसभा चुनाव में सरोज पांडेय दुर्ग से सांसद चुनी गई।एक साथ महापौर, विधायक और सांसद बनने का उन्होंने रिकार्ड बनाया। उनके इस्तेफे के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस के भजन सिंह निरंकारी ने भाजपा के जागेश्वर साहू को लगभग 12 सौ वोट से हराया।2013 में चुनाव में निंरकारी से मुकाबले के लिए भाजपा ने विद्यारतन भसीन को मैदान मे उतारा। श्री भसीन ने 24 हजार वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।राज्य की ये ऐसी सीट है जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला है। दोनों पार्टियां एक दूसरे को मात देती आ रही है। इस बार अजीत जोगी की दस्तक से सियासी लड़ाई त्रिकोणीय होने की उम्मीद है।2013 के चुनाव नतीजे मर बीजेपी के विद्यारतन भसीन को 72594 वोट मिले थे।कांग्रेस के भजन सिंह निरंकारी को 48146 वोट मिले थे।2009 उपचुनाव के नतीजे में कांग्रेस के भजन सिंह निरंकारी को 47225 वोट मिले थे।बीजेपी के जगेश्वर साहू को 45997 वोट मिले थे। 2008 के चुनाव परिणाम में बीजेपी की सरोज पांडेय को 63078 वोट मिले थे।कांग्रेस के बृजमोहन सिंह 41811 वोट मिले थे। अहिवारा विधानसभा अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में एक नगर पालिका निगम, दो नगर पालिका परिषद जामुल व अहिवारा में शामिल है। इसमें ग्रामीण वार्ड अधिक है। परिसीमन के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस व भाजपा ने नए चेहरों को मौका दिया है मगर दोनों बार कांग्रेस को मुहं की खानी पड़ी इसका फायदा भाजपा को हुआ।वहीं वर्ष 2008 में विधायक के रुप में डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को भाजपा ने टिकट दिया तो कांग्रेस ने ओनी महिलांग पर विश्वास जताया था। इसी तरह वर्ष 2013 में भाजपा ने सांवलाराम डाहरे व कांग्रेस ने अशोक डोंगरे को टिकट दिया।दोनों में बार भाजपा की जीत हासिल हुई। कांग्रेसियों को दो कार्यकाल में जीत का मुंह तक नही देख पाए है। भाजपा प्रत्याशी को करीब 12,000 वोट से चुनाव जीत गए।वही कांग्रेस के अशोक डोंगरे को 13,000 मतों से हार का मुंह देखना पड़ा था। दो-दो बार हारने के बाद कांग्रेस अहिवारा विधानसभा को पाने नए चेहरे की तलाश में जुट गई है।

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