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चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं सवाल

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भोपाल(ईएमएस)। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा का मतदान संपन्न हो चुका है। तेलंगाना और राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना है। इन सभी पांचों राज्यों में मतगणना का कार्य 11 दिसंबर को होगा। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि पूरे एक माह तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में रखने का औचित्य क्या है, इससे कहीं न कहीं गड़बड़ी होने की आशंका को बल मिलता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जब यह हाल है तो लोकसभा के चुनाव में क्या होगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान 12 नवंबर को संपन्न हो गया था, द्वितीय चरण का मतदान 20 नवंबर को संपन्न हुआ। मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ। लंबे समय तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में बंद रखने का औचित्य लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। मध्य प्रदेश में तो कुछ जगहों की ईवीएम दो दिन बाद तक स्ट्रांग रुम पहुंचीं, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल के स्ट्रांग रुम की लाइट जाने और कैमरे बंद होने जैसे मामलों को भी प्रमुख विपक्षी दल प्रमुखता से उठा रहे हैं। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए 10 फीसद ईवीएम अतिरिक्त रखी गई थीं। मतदान के दौरान ईवीएम खराब होती हैं तो उनकी जगह इन मशीनों को बदलना था। 10 फीसद ईवीएम मशीनें बगैर मॉक पोल के ही विभिन्न केंद्रों तक पहुंचा दी गईं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि उन्हें बड़े स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को भी अवगत कराया है। इस संबंध में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश वीएल कांताराव का कहना रहा है कि ईवीएम सुरक्षित हैं। किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है। उन्होंने यहां यह जरुर बताया कि भोपाल स्ट्रांग रुम के बाहर लगी एलईडी कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं, लेकिन उन्हें चालू करवा दिया गया था। 000 मतपत्र के समय तीन दिन में आ जाता था परिणाम चुनाव परिणाम के लिए लंबा इंतजार लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। राजनीतिक ही नहीं बल्कि आम लोगों का भी सवाल है कि जब चुनाव मतपत्रों के माध्यम से होते थे। तब महज तीन दिनों में ही परिणाम आ जाता था। अब जबकि आधुनिक तकनीक के साथ ईवीएम मशीनों से वोटिंग कराई जा रही है तो फिर एक माह जैसा लंबा इंतजार परिणाम के लिए किया जाना कहीं न कहीं चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर ही सवालिया निशान लगाते हैं। विपक्ष इस मामले को ईवीएम में गड़बड़ी और छेड़छाड़ से जोड़कर देख रहा है। 000 सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्य प्रदेश में भले ही चुनाव खत्म हो गए हों, लेकिन सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा विवाद ईवीएम को लेकर है। ईवीएम मशीनें जिस तरह स्ट्रॉंग रुम में आने के पहिले होटलों में रखी गईं। कई घंटों बाद उन्हें गुपचुप तरीके से स्ट्रांग रुम में जमा किया जा रहा था उससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 000 चुनाव के बीच बदले मुख्य चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कार्यकाल 1 दिसंबर 2018 को पूर्ण हो गया, इसी के साथ 02 दिसंबर को सुनील अरोड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालेंगे। राजस्थान केडर के सुनील अरोड़ा अब चुनाव आयुक्त का पद संभालने जा रहे हैं। राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान हैं। इस पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि जब गुजरात में विधानसभा के चुनाव थे उस समय अचल कुमार ज्योति मुख्य चुनाव आयुक्त थे। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव ओपी रावत जो मप्र केडर के अधिकारी थे, उनकी देखरेख में हुए। चुनाव आयोग ने जो कार्यक्रम 5 राज्यों के लिए जारी किया था उसमें भी प्रधानमंत्री की राजस्थान सभा को देखते हुए कार्यक्रम परिवर्तित करने का आरोप लगा था, जिस कारण चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिंह लग रहे हैं। वहीं विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल रहा है। भोपाल । मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा का मतदान संपन्न हो चुका है। तेलंगाना और राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना है। इन सभी पांचों राज्यों में मतगणना का कार्य 11 दिसंबर को होगा। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि पूरे एक माह तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में रखने का औचित्य क्या है, इससे कहीं न कहीं गड़बड़ी होने की आशंका को बल मिलता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जब यह हाल है तो लोकसभा के चुनाव में क्या होगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान 12 नवंबर को संपन्न हो गया था, द्वितीय चरण का मतदान 20 नवंबर को संपन्न हुआ। मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ। लंबे समय तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में बंद रखने का औचित्य लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। मध्य प्रदेश में तो कुछ जगहों की ईवीएम दो दिन बाद तक स्ट्रांग रुम पहुंचीं, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल के स्ट्रांग रुम की लाइट जाने और कैमरे बंद होने जैसे मामलों को भी प्रमुख विपक्षी दल प्रमुखता से उठा रहे हैं। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए 10 फीसद ईवीएम अतिरिक्त रखी गई थीं। मतदान के दौरान ईवीएम खराब होती हैं तो उनकी जगह इन मशीनों को बदलना था। 10 फीसद ईवीएम मशीनें बगैर मॉक पोल के ही विभिन्न केंद्रों तक पहुंचा दी गईं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि उन्हें बड़े स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को भी अवगत कराया है। इस संबंध में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश वीएल कांताराव का कहना रहा है कि ईवीएम सुरक्षित हैं। किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है। उन्होंने यहां यह जरुर बताया कि भोपाल स्ट्रांग रुम के बाहर लगी एलईडी कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं, लेकिन उन्हें चालू करवा दिया गया था। 000 मतपत्र के समय तीन दिन में आ जाता था परिणाम चुनाव परिणाम के लिए लंबा इंतजार लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। राजनीतिक ही नहीं बल्कि आम लोगों का भी सवाल है कि जब चुनाव मतपत्रों के माध्यम से होते थे। तब महज तीन दिनों में ही परिणाम आ जाता था। अब जबकि आधुनिक तकनीक के साथ ईवीएम मशीनों से वोटिंग कराई जा रही है तो फिर एक माह जैसा लंबा इंतजार परिणाम के लिए किया जाना कहीं न कहीं चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर ही सवालिया निशान लगाते हैं। विपक्ष इस मामले को ईवीएम में गड़बड़ी और छेड़छाड़ से जोड़कर देख रहा है। 000 सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्य प्रदेश में भले ही चुनाव खत्म हो गए हों, लेकिन सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा विवाद ईवीएम को लेकर है। ईवीएम मशीनें जिस तरह स्ट्रॉंग रुम में आने के पहिले होटलों में रखी गईं। कई घंटों बाद उन्हें गुपचुप तरीके से स्ट्रांग रुम में जमा किया जा रहा था उससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 000 चुनाव के बीच बदले मुख्य चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कार्यकाल 1 दिसंबर 2018 को पूर्ण हो गया, इसी के साथ 02 दिसंबर को सुनील अरोड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालेंगे। राजस्थान केडर के सुनील अरोड़ा अब चुनाव आयुक्त का पद संभालने जा रहे हैं। राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान हैं। इस पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि जब गुजरात में विधानसभा के चुनाव थे उस समय अचल कुमार ज्योति मुख्य चुनाव आयुक्त थे। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव ओपी रावत जो मप्र केडर के अधिकारी थे, उनकी देखरेख में हुए। चुनाव आयोग ने जो कार्यक्रम 5 राज्योंभोपाल । मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा का मतदान संपन्न हो चुका है। तेलंगाना और राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना है। इन सभी पांचों राज्यों में मतगणना का कार्य 11 दिसंबर को होगा। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि पूरे एक माह तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में रखने का औचित्य क्या है, इससे कहीं न कहीं गड़बड़ी होने की आशंका को बल मिलता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जब यह हाल है तो लोकसभा के चुनाव में क्या होगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान 12 नवंबर को संपन्न हो गया था, द्वितीय चरण का मतदान 20 नवंबर को संपन्न हुआ। मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ। लंबे समय तक ईवीएम को स्ट्रांग रुम में बंद रखने का औचित्य लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। मध्य प्रदेश में तो कुछ जगहों की ईवीएम दो दिन बाद तक स्ट्रांग रुम पहुंचीं, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल के स्ट्रांग रुम की लाइट जाने और कैमरे बंद होने जैसे मामलों को भी प्रमुख विपक्षी दल प्रमुखता से उठा रहे हैं। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए 10 फीसद ईवीएम अतिरिक्त रखी गई थीं। मतदान के दौरान ईवीएम खराब होती हैं तो उनकी जगह इन मशीनों को बदलना था। 10 फीसद ईवीएम मशीनें बगैर मॉक पोल के ही विभिन्न केंद्रों तक पहुंचा दी गईं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि उन्हें बड़े स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को भी अवगत कराया है। इस संबंध में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश वीएल कांताराव का कहना रहा है कि ईवीएम सुरक्षित हैं। किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है। उन्होंने यहां यह जरुर बताया कि भोपाल स्ट्रांग रुम के बाहर लगी एलईडी कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं, लेकिन उन्हें चालू करवा दिया गया था। 000 मतपत्र के समय तीन दिन में आ जाता था परिणाम चुनाव परिणाम के लिए लंबा इंतजार लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। राजनीतिक ही नहीं बल्कि आम लोगों का भी सवाल है कि जब चुनाव मतपत्रों के माध्यम से होते थे। तब महज तीन दिनों में ही परिणाम आ जाता था। अब जबकि आधुनिक तकनीक के साथ ईवीएम मशीनों से वोटिंग कराई जा रही है तो फिर एक माह जैसा लंबा इंतजार परिणाम के लिए किया जाना कहीं न कहीं चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर ही सवालिया निशान लगाते हैं। विपक्ष इस मामले को ईवीएम में गड़बड़ी और छेड़छाड़ से जोड़कर देख रहा है। 000 सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्य प्रदेश में भले ही चुनाव खत्म हो गए हों, लेकिन सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा विवाद ईवीएम को लेकर है। ईवीएम मशीनें जिस तरह स्ट्रॉंग रुम में आने के पहिले होटलों में रखी गईं। कई घंटों बाद उन्हें गुपचुप तरीके से स्ट्रांग रुम में जमा किया जा रहा था उससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 000 चुनाव के बीच बदले मुख्य चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कार्यकाल 1 दिसंबर 2018 को पूर्ण हो गया, इसी के साथ 02 दिसंबर को सुनील अरोड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालेंगे। राजस्थान केडर के सुनील अरोड़ा अब चुनाव आयुक्त का पद संभालने जा रहे हैं। राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान हैं। इस पर सवाल उठाने वाले कह रहे हैं कि जब गुजरात में विधानसभा के चुनाव थे उस समय अचल कुमार ज्योति मुख्य चुनाव आयुक्त थे। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव ओपी रावत जो मप्र केडर के अधिकारी थे, उनकी देखरेख में हुए। चुनाव आयोग ने जो कार्यक्रम 5 राज्यों के लिए जारी किया था उसमें भी प्रधानमंत्री की राजस्थान सभा को देखते हुए कार्यक्रम परिवर्तित करने का आरोप लगा था, जिस कारण चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिंह लग रहे हैं। वहीं विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल रहा है। के लिए जारी किया था उसमें भी प्रधानमंत्री की राजस्थान सभा को देखते हुए कार्यक्रम परिवर्तित करने का आरोप लगा था, जिस कारण चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिंह लग रहे हैं। वहीं विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल रहा है।

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