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कर्ज माफी के नाम पर करोड़ों का घोटाला, हजारों ‎किसानों के साथ हुआ फर्जीवाड़ा सहकारी ‎समी‎तियों में अ‎धिका‎रियों और व्यवस्थापकों ने की गड़बड़ी ‎

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डूंगरपुर । नई सरकार के बनते ही राजस्थान में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के घोटाले सामने आने लगे हैं। पूरे देश में जहां किसानों को कर्ज से राहत देने की कवायद जारी है, तो वहीं राजस्थान के डूंगरपुर ‎जिले में ‎किसानों से हुई करोड़ों रुपयों की धोखाधडी का मामला सामने आया है। यहां 1719 किसानों के नाम से सहकारी बैंकों से तकरीबन 8 करोड़ रुपए का लोन ‎लिया गया, ले‎किन जब कर्जमाफी की कवायद शु़रु हुई तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामला इस ‎जिले के गोवाड़ी, जेठाणी और गामड़ा ब्राह्म‎म‎‎णिया की बृहत कृ‎षि बहुउद्देदेशीय सहकारी समीतियों (लेम्पस) का है। जब सरकार ने ‎किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की तो पहले दौर में 50 हजार रुपए तक का कर्ज माफ ‎किया गया। ले‎किन कर्ज माफी के दूसरे चरण में फर्जी कर्ज माफी के कई मामले सामने आये। जिन्हे वर्तमान दौर में चुकता करने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि जब यह मामला गरमाया तो सरकार ने इस पूरे मामले की छानबीन करना शुरु कर दी। ऐसे मामला सामने आया शुरुआत में ‎जिन ‎किसानों को कर्ज देने से मना ‎किया गया था उनके नाम पर भी लोन जारी कर ‎दिये गये। वहीं कुछ ‎किसानों को कर्ज की रा‎शि से अ‎धिक राहत रा‎शि दे दी गई, ‎जिसके बारे में खुद खाता धारक को भी जानकारी नहीं थी। ऑनलाइन ‎लिस्ट में नजर आई गड़बडी जब राहत रा‎शि ‎मिलने वाले ‎किसानों की सूची जारी की गई, तो उसमें उन ‎किसानों के नाम और खाते शा‎मिल ‎किए गए ‎जो ‎कि देश में ही नहीं रह रहे हैं, कुछ सालों से खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। चूं‎कि इस कर्जमाफी योजना में ‎‎बिना रा‎शि जमा कराए कर्ज से राहत दी गयी, ‎जिसका फायदा उठाते हुए 8 करोड़ 30 लाख रुपए का हेरफेर ‎किया गया। मामले की जांच के ‎दिए आदेश जब पूरा मामला सामने आया तो प्रदेश के सहका‎रिता मंत्री उदयलाल आंजना ने पूरे प्रदेश में जांच के आदेश ‎दिये। साथ ही घोटाला करने वालों के साथ साथ उन अ‎‎धिका‎रियों को भी घेरे में ले ‎लिया है जो इस मामले में शा‎मिल हैं। जांच के ‎लिए समिति का गठन ‎किया गया है। जांच से बढ़ सकती है घोटाले की रा‎शि मामले की जांच के ‎लिए अ‎तिरिक्त रजिस्ट्रार की ‎निगरानी में टी बनाई गई है। साथ ही रजिस्ट्रार नीरज के. पवन ने लोन सुपरवाइजर को ‎‎निलं‎बित करने के आदेश जारी ‎किया है। वहीं तीन लेम्प्स व्यवस्थापकों के अ‎धिकार भी छीन ‎लिए गए हैं। जांच के बाद इस घोटाले की रा‎‎शि और अ‎धिक बढ़ सकती है।

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