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युवाओं में नशे की प्रवृत्ति की रोकथाम के लिये भोपाल संभाग में व्यापक जन-जागरण कर सभी की सहभागिता सुनिश्चित की जाये – संभागायुक्त श्रीमती श्रीवास्तव

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भोपाल | संयुक्त राष्ट्र संघ डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा संभाग प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आज युवाओं में नशीली दवाओं और शराब आदि मादक पदार्थों की प्रवृत्ति को रोकने के लिये विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता संभागायुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने की। कार्यशाला में कलेक्टर डॉ. सुदाम खाडे, आईजी श्री जयदीप प्रसाद सहित संबंधित विभागों के शासकीय सेवक उपस्थित थे। संभागायुक्त श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि सभी शासकीय विभाग, एनजीओ, अभिभावक तथा समाज के सभी नागरिकों को इस विषय की गंभीरता को समझते हुए नशे की रोकथाम के लिए सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक जनजागरण कर इसकी रोकथाम के प्रयासों को एक सतत जनांदोलन का रूप देना होगा तभी समस्या का जड़-मूल नाश संभव है। यह मध्यप्रदेश शासन के वचन पत्र का महत्वपूर्ण बिन्दु है, इसकी पूर्ति प्राथमिकता से करना है। संभागायुक्त ने कहा कि कार्ययोजना केवल सभाकक्ष और प्रस्तुतिकरण तक ही सीमित न रहे बल्कि कार्ययोजना का क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर पूरी तत्परता और कुशलता से करना हम सभी की जिम्मेदारी है। किशोर तथा युवा सुसंस्कारित होकर सभ्य नागरिक बनें यह दायित्व भी हमें निभाना है। नशीले पदार्थों की गैर कानूनी उपलब्धता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सभी को समग्रता के साथ कार्य करना होगा। कलेक्टर डॉ. खाडे ने कहा कि नशे की प्रवृत्तियों के लिये संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हांकित कर विशेष प्रयास करने होंगे ताकि इस समस्या को निर्मूल किया जा सके। आईजी श्री जयदीप प्रसाद ने कहा कि पुलिस, जनसामान्य एवं अभिभावक आपसी समन्वय से इस बुराई की रोकथाम के लिये सार्थक प्रयास कर सकते हैं। यूएनडीपी के स्टेट हेड डॉ. राजेश मल्होत्रा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए रोकथाम की कार्ययोजना प्रस्तुत की। कार्यशाला में बताया गया कि कैसे युवाओं को नशीले पदार्थों को छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाये। नशीले पदार्थों के उपयोग से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके लिए संभाग के हर गांव में प्रचार प्रसार कर युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाव के उपाय बताए जायें। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का अवैध व्यापार करने वालों की जानकारी हेतु एक टोल फ्री नंबर स्थापित किए जाने तथा सभी चिकित्सालयों में नशे की लत छुड़ाने के लिए अलग वार्ड तथा चिकित्सक की व्यवस्था किए जाने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार कर त्वरित निर्णय लिया जाना समयानुकूल होगा।

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