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आरके पटेल को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने गरमाई बांदा लोकसभा की सियासत

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चित्रकूट, । भाजपा हाईकमान ने पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद आरके सिंह पटेल को बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित कर चुनाव को खासा रोचक बना दिया है। पार्टी ने 2014 में चुनाव जीतने वाले भैरो प्रसाद मिश्र का टिकट काटकर विधायक आरके सिंह पटेल के प्रति विश्वास जताया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव त्रिकोणात्मक संघर्ष में पहुंच गया है। तमाम तरह के कयास व अटकलों के दौर के बीच भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने मानिकपुर से पार्टी विधायक आरके सिंह पटेल को बांदा-चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित कर सिटिंग सांसद भैरो प्रसाद मिश्र के खेमे में मायूसी ला दी है। आरके सिंह पटेल राजनीति के माहिर खिलाड़ी होने के साथ 2009 में सपा से सांसद रहे हैं। इसके पहले 1993 में कर्वी विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। भैरो प्रसाद मिश्र से वे 198 वोटों से हार गये थे। 1996 में फिर मध्यावधि चुनाव हुए। आरके सिंह पटेल विधायक चुने गये। 2002 तक विधायक रहे, 2002 में पुनः विधायक चुने गये। 2007 तक भाजपा-बसपा गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 2007 का विधानसभा चुनाव सपा से लडे़ थे, 11 सौ वोटों से बसपा प्रत्याशी दिनेश मिश्रा से पराजित हो गये थे। 2009 में बांदा संसदीय क्षेत्र से सपा के टिकट से चुनाव लड़कर सांसद चुने गये। 1991 से राजनीति में सक्रिय आरके सिंह पटेल ने खासतौर पर बुन्देलखण्ड समेत सूबे के गरीबों, मजदूरों, दलितों एवं कमजोर वर्गों के लोगों को जोड़कर सामाजिक उत्थान के कार्य किये। बुन्देलखण्ड समेत फतेहपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर, बनारस, कानपुर आदि जिलों में जनमानस के बीच मोदी व योगी की सरकार की नीतियों का प्रचार-प्रसार करते आ रहे हैं। अब पूर्व सांसद बालकुमार सिंह पटेल कांग्रेस से प्रत्याशी हैं तो भाजपा के सिटिंग सांसद श्यामाचरण गुप्ता सपा-बसपा गठबंधन से उम्मीदवार हैं। इन तीनों के बीच चुनाव खासा रोचक हो गया है। पटेल वोटों की खींचतान जहां आरके पटेल व बालकुमार पटेल के बीच होगी, वहीं गठबंधन के भी वोटों को आरके सिंह पटेल प्रभावित करें तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए, क्योंकि आरके पटेल राजनीति के धुरंधर ही नहीं, बल्कि क्षत्रप भी माने जाते हैं।

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