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लोकसभा चुनाव में बाजी पलट सकते हैं युवा वोटर

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2019 के लोक सभा चुनावों के बाद किसकी सरकार बनेगी - इसे तय करने में युवा वोटर की बहुत बड़ी भूमिका होने जा रही है। वोट की इसी ताकत के चलते हर पार्टी और उम्मीदवारों की नजर युवाओं और नए मतदाताओं पर टिकी हैं। इसीलिए चुनाव की तारीखों के एलान होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा वोटरों को संबोधित करते हुए उनसे अधिक से अधिक वोट करने की अपील की थी। इन्हीं युवाओं की बदौलत ही 2014 में बीजेपी ने सरकार बनाई थी. अब जब 2019 के चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है बीजेपी ने एक बार फिर युवाओं को लुभाने की तैयारी शुरू कर दी है. राहुल गाँधी 2019 में किस राज्य में किसके साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे अभी ये भी तय नहीं हैए लेकिन 2019 की तैयारी में बीजेपी कांग्रेस से कई कदम आगे की तैयारियों में जुटी हुई है। डसके निशाने पर युवा वोटर सबसे आगे हैं। न्यूज18 इंडिया की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के लिए केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी ने युवा मतदाताओं को लक्ष्य बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर ही योजना तैयार की है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने युवाओं को लुभाने और उनके वोट हासिल करने के लिए एक बड़ा कार्यक्रम बनाया है। ताकि 2014 के लोकसभा चुनावों की तरह बीजेपी को युवाओं का वोट पड़े और पार्टी की जीत की राह आसान हो। एक अनुमान के मुताबिक 2019 के आम चुनाव में 14 करोड़ से अधिक युवा पहली बार मतदान करेंगे. ये संख्या करीब उत्तर प्रदेश के कुल मतदाताओं के बराबर है. 2014 में करीब 15 करोड़ नए मतदाता थे. अगर इन्हें भी मिला लिया जाए तो 2019 में 18 से 23 साल की उम्र के 28 करोड़ से भी ज्यादा वोटर होंगे. चुनाव आयोग के अनुसार - 2014 में 83.41 करोड़ कुल मतदाताओं में से 11.72 करोड़ ने पहली बार वोट डाला था. यही वजह है बीजेपी इस बार पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर ज्यादा फोकस कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा फोकस युवा वोटों पर है। उनको उम्मीद है कि पिछली बार की तरह 18 साल से लेकर 40 साल तक युवा बीजेपी के लिए वोट डालेंगे। इसीलिए वो अपने कार्यक्रमों में युवाओं का जिक्र करते रहे हैं। बीजेपी ने युवाओं को साधने के लिए देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इन सभी कार्यक्रमों को एक इवेंट के तरह किया जा रहा है ताकि यह लोगों की खासकर युवाओं की नजरों में आए। ये कार्यक्रम नेशन विद नमो अभियान के तहत किए जा रहे हैं इस कार्यक्रम के तहत बीजेपी उन मतदाताओं का लुभा रही है जो 2019 में पहली बार वोट डालेंगे. जहा एक तरफ कॉलेज, यूनिवर्सिटी में प्रचार कार्यक्रम चल रहा है वहीं दूसरी ओर कैम्पस अम्बेसेडर नेटवर्क कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इन कार्यक्रमों में सांसद और विधायक भी शरीक हो रहे हैं 2014 में बीजेपी सोशल मीडिया के मंच पर इतनी बड़ी ताकत थी कि उसका कोई पार्टी तकनीक के मामले में मुकाबला नहीं कर पाई थी। बीजेपी की सोशल मीडिया प्रेजेंस ने भी 2014 में काम आसान कर दिया था। लेकिन 2014 से लेकर 2019 तक कहानी काफी बदल चुकी है। पिछले चुनाव में भी बीजेपी के निशाने पर फर्स्ट टाइम वोटर था और उसे लुभाने के लिए कई कदम उठाए गए थेण् 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रचार का सबसे बड़ा मंच फेसबुक था मोदी की टीम ने ट्विटर पर भी प्रचार किया था् ज्यादातर मैसेज टेक्स्ट के जरिए दिए जाते रहे. 2015 में जब बिहार चुनाव आया तो फेसबुक से ज्यादा फर्स्ट टाइम वोटर को लुभाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया गया, मुन्ना से नीतीश नाम की विडियो कॉमिक सीरीज युवाओं को व्हाट्सएप पर भेजी गई, इसके बाद 2017 में भी व्हाट्स एप के जरिए युवाओं तक पहुंचने का प्रयास हुआ, 2019 के चुनाव स्मार्ट फोन इतने सस्ते हो चुके हैं कि हर युवा के हाथ में हैं, इस चुनाव में लगता है कि सबका जोर विडियो कंटेट युवाओं तक पहुंचाने पर रहने वाला है. कांग्रेस ने 2014 के चुनाव से सबक लिया है। तब भाजपा ने यूपीए सरकार के 10 साल के शासन के खिलाफ युवाओं के गुस्से को अपने पक्ष में भुनाया था। कांग्रेस का भी मानना है कि अगले चुनाव में दूसरी बार वोट डालने वाले 11 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं पर दांव लगाना इस बार ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। कांग्रेस सोशल मीडिया के पर मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रही है। इसके अलावा ग्रीन रूम टीम बनाकर युवाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश भी की जा रही है। कांग्रेस की ग्रीन रूम टीम में युवा महिलाएं ज्यादा हैं इनमें प्रियंका के अलावा न्सुई की रुचि गुप्ता, कांग्रेस सोशल मीडिया प्रभारी दिव्या राम्या स्पंदना सक्रिय रूप से जुड़ी हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस टीम के काम.काज को देख रहे हैं. मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और शशि थरूर भी इस टीम का हिस्सा हैं यूं तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही युवाओं, महिलाओं, किसानों, पिछड़ों पर ध्यान लगाए बैठी हैं, लेकिन दोनों ही पालों में सबसे बड़ा वोट बैंक युवाओं को समझा जा रहा है। क्योंकि युवा वोट बैंक धर्म जाति में कम बंटा है बल्कि उसके मन में वही पार्टी जगह बना सकती है जो बेहतर कल तैयार करे.

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