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सत्ता परिवर्तन के साथ सियासत में उलझा मेडिकल

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अलीगढ़, । करीब 10 साल पहले छेरत में राजकीय हॉम्योपैथिक हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज की स्थापना शुरू हुई तो राह आसान होती दिखी। जुलाई 2018 को यहां ओपीडी शुरू होने से मरीजों को तो राहत मिलने लगी है, मगर शैक्षिक सत्र आज तक शुरू नहीं हो पाया है। 2019-20 में सत्र शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत अलीगढ़ व गोरखपुर में नए राजकीय होम्योपैथिक हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज बनाने का निर्णय लिया था। एक-एक अरब की धनराशि भी जारी की। सीएनडीसी (जल निगम की निर्माण ईकाई) ने काम शुरू किया। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले मंत्री रहे जयवीर सिंह ने एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती कराकर ओपीडी का उद्घाटन कर दिया था। सत्ता परिवर्तन के साथ यह कॉलेज भी सियासत में उलझ गया। निर्माण में देरी व बजट रिवाइज कराने के फेर में काम अटक गया। लखनऊ से विद्यार्थियों के दाखिले व सत्र शुरू करने की हर साल घोषणा हुई, मगर परवान नहीं चढ़ी। पिछले साल मई-जून में सरकार ने यहां प्राचार्य, 12 प्रवक्ता, तीन रीडर, एक वरिष्ठ आवासीय चिकित्साधिकारी, दो आवासीय चिकित्साधिकारी, दो चिकित्साधिकारी, 23 पैरामेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति कर दी। स्टॉफ की नियुक्ति के बाद यहां हॉस्पिटल शुरू हो गया है। 18 ओपीडी व पैथोलॉजिकल जांच शुरू हो गई हैं। सप्ताह में दो दिन आयुष डोर-टू-डोर अभियान चल रहा है। अब कॉलेज शुरू होने का इंतजार है। बसपा के मंडल जोन इंचार्ज रघुवीर सिंह ऊषवा का कहना है कि बसपा सरकार में कॉलेज की स्थापना शुरू हुई। भारत सरकार ने कॉलेज शुरू करने में रूचि नहीं दिखाई। प्राचार्य डॉ. योगेंद्र माहौर का कहना है कि रोजाना 250 से अधिक मरीज ओपीडी में देखे जा रहे हैं। उम्मीद है कि सत्र 2019-20 में पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

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