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दिन में तीन रुप बदलती है रानगिर की माता हरसिद्धि

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दमोह- बुंदेलखंड की धरती पर आदिशक्ति मां जगदंबा अनेक रुपों में विराजमान हैं हर स्थान का अपना अपना प्रभाव व प्रमाण है मां दुर्गा के इन मंदिरों में यूं तो सालभर भक्त माता के दर्शनों को आते हैं परंतु साल की दोनों नवरात्र में इन सिद्ध पीठों पर भक्तों का तांता लगा रहता है प्रमुख रूप से रहली के पास मां हरसिद्धि देवी रानगिर मंदिर प्रमुख हैं दमोह जिले से 90 किलोमीटर दूर तथा तेन्दूखेड़ा से 85 किलोमीटर दूर नरसिंहपुर मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र रानगिर अपने आप में एक विशेषता समेते हुए हैं देहार नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में विराजी मां हरसिद्धि देवी की मूर्ति दिन में तीन रुपों में दर्शन देती है प्रातः काल में कन्या दोपहर में युवा और सायंकाल प्रौढ़ रुप में माता के दर्शन होते हैं जो सूर्य चंद्र और अग्नि इन तीन शक्तियों के प्रकाशमय तेजोमय तथा अमृतमय करने का संकेत है किवदंती के अनुसार देवी भगवती के 52 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक शक्तिपीठ है सिद्ध क्षेत्र रानगिर यहां पर सती की रान गिरी थी इस कारण यह क्षेत्र रानगिर कहलाया *वन कन्या बन देती थी चांदी का सिक्का* हरसिद्धि माता के बारे में कई किवदन्तियां प्रचलित है एक किवदंती के अनुसार रानगिर में एक चरवाहा हुआ करता था चरवाहे की एक छोटी बेटी थी बेटी के साथ एक वन कन्या रोज आकर खेतली थी एवं अपने साथ भोजन कराती थी तथा रोज एक चांदी का सिक्का देती थी चरवाहे को जब इस बात की जानकारी लगी तो एक दिन छुपकर दोनों कन्या को खेलते देख लिया चरवाहे की नजर जैसे ही वन कन्या पर पड़ी तो उसी समय वन कन्या ने पाषाण रुप धारण कर लिया बाद में चरवाहे ने कन्या का चबूतरा बना कर उस पर छाया आदि की और यहीं से मां हरसिद्धि की स्थापना हुई रानगिर का रहस्य दूसरी किवदंती के अनुसार भगवान शंकरजी ने एक बार सति के शव को हाथों में लेकर क्रोध में तांडव नृत्य किया था नृत्य के दौरान सती माता के अंग पृथ्वी पर गिरे थे सती माता के अंग जिन जिन स्थानों पर गिरे वह सभी शक्ति पीठों के रूप में प्रसिद्ध है ऐसा मान्यता है कि रानगिर में सती माता की राने जांधे गिरी थी और इसीलिए इस क्षेत्र का नाम रानगिर पड़ा रानगिर के पास ही गौरीदांत नामक क्षेत्र है यहां सती माता के दांत गिरना माना जाता है एक अन्य किंवदंती के अनुसार भगवान राम ने वनवास के दौरान रानगिर के पर्वतों पर विश्राम किया था और इस कारण इस क्षेत्र का नाम रामगिरी था जो बाद में रानगिर हो गया *नवरात्र पर दर्शन करने का विशेष महत्व* नवरात्र के दिनों में माता के दर्शन कर आराधना करने का विशेष महत्व होने के कारण भारी भीड़ होती है प्राचीन काल से ऐसा मान्यता है कि माता से जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूर्ण होती है इसी कारण माता हरसिद्धि माता पुकारा जाता है सिद्धिदात्री माता दिन में तीन रुप में धारण करने को भी प्रसिद्ध है

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